
उज्जैन। श्रावण मास के पहले सोमवार को उज्जैन में भगवान महाकाल की सवारी निकली। 100 किलो की चांदी की नई पालकी में सवार होकर भगवान महाकाल ने मनमहेश रूप में लाखों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
सवारी शुरू होने से पहले मंदिर के सभामंडप में भगवान की चांदी की प्रतिमा का शासकीय पुजारी पंडित घनश्याम शर्मा ने पूजन-अर्चन किया। इसके बाद भगवान की प्रतिमा को पालकी में विराजित किया गया। पूजन में मंत्री तुलसी सिलावट सहित कई जनप्रतिनिधि व प्रशासन और समिति के अधिकारी शामिल हुए। शाम 4 बजे सवारी निकलना शुरू हुई। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस के जवानों ने राजधिराज महाकाल को सलामी देकर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया। सवारी में आगे तोपची, घोड़ों पर सवार पुलिस के जवान, धार्मिक धुन बजाता पुलिस का बैंड, सशस्त्र जवानों की टुकड़ियां व 09 भजन मंडलियां शामिल थी। पालकी के साथ मंदिर के पंडे-पुजारी पैदल निकले। श्रावण मास में इस बार कुल चार सवारी है पहली सवारी निकलने के बाद अब दूसरी सवारी 21 जुलाई सोमवार को आएगी।
रामघाट पर शिप्रा जल से अभिषेक 500 बटुकों ने एक साथ किया उद्घोष
सवारी मन्दिर से निकलकर महाकाल चौराहा, गुदरी, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट राणोजी की छत्री पर पहुंची जहां पुजारियों ने शिप्रा के जल से बाबा का अभिषेक किया। पुजन के बाद सवारी रामानुजकोट, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मन्दिर, पटनी बाजार, गुदरी से होते हुए देरशाम मन्दिर पहुंची। पहली बार सवारी नई थीम पर निकाली गई जिसमें 25 गुरुकुलों से आए 500 बटुकों ने शिप्रा के रामघाट व दत्त अखाड़ा घाट पर बैठकर वैदिक उद्घोष किया। घाट पर मौजूद लाखों लोग यह नजारा देखकर मंत्रमुग्ध हो गए।
जनजातीय कलाकारों ने दी प्रस्तुति, मार्ग में फूलों की वर्षा
सवारी के दौरान जनजातीय कलाकारों ने भी संगीत के वाद्य यंत्रों के साथ अपनी प्रस्तुति दी। पहली बार सवारी में इन कलाकारों को आमंत्रित किया गया था। हमारे मार्ग पर प्रमुख स्थानों पर पालकी का पूजन श्रद्धालुओं ने किया तो कई जगह फूलों की वर्षा का स्वागत किया गया।
