बेंगलुरु, कर्नाटक की राजनीति में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर घमासान और तेज हो गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के बहाने एक सुनियोजित साजिश के तहत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के मतदाताओं को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है, और इसके लिए बड़ी संख्या में ‘फॉर्म 7’ के आवेदन जमा किए जा रहे हैं ताकि पात्र नागरिकों के नाम अवैध रूप से हटाए जा सकें।
एक बड़े गिरोह और बीजेपी नेताओं पर मिलीभगत का आरोप, चुनाव आयोग से मांगा गया आधिकारिक डेटा
डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिसमें कुछ विपक्षी दल और भाजपा के नेता भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस अधिकारियों, जिला उपायुक्तों (DCs) और राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से पूरा डेटा तलब किया है। शिवकुमार के अनुसार, अब तक 50 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से गायब हो चुके हैं, और इस गंभीर अनियमितता के खिलाफ कांग्रेस पार्टी और इंडिया गठबंधन देशव्यापी स्तर पर कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे।
INDIA गठबंधन के देशव्यापी ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ का ऐलान, 2 से 8 अक्टूबर तक चलेगा विरोध प्रदर्शन
गौरतलब है कि इस पूरे विवाद के बीच विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन ने नई दिल्ली में हुई अपनी उच्चस्तरीय बैठक के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं के निर्देशानुसार, 2 से 8 अक्टूबर तक देश भर में जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ निकाला जाएगा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों, मतदाता सूचियों की पारदर्शिता और नागरिकों के वोट देने के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए हर स्तर पर यह लड़ाई लड़ेंगे।

