बागली: बागली नगर से जुड़े वरिष्ठ विद्वान ब्राह्मण चंद्रशेखर जी त्रिवेदी के पुत्र पंडित रघुनंदन त्रिवेदी का 85 वर्ष की उम्र में गड़ी चौक स्थित पैतृक निवास पर अल्प बीमारी के चलते बुधवार शाम को निधन हो गया गौर तलब है कि दिवंगत रघुनंदन त्रिवेदी के बड़े भाई पंडित शंकर लाल त्रिवेदी मां भवानी के अनन्य भक्त रहे उनकी नौ दिवसीय कठिन साधना के किस्से पूरे क्षेत्र में चर्चित है। नवरात्रि पर्व पर उनके द्वारा बहुत ही दुर्लभ एवं कठिन साधना की जाती रही राज परिवार की माता राजराजेश्वरी मंदिर की स्थापना उन्हीं के परिवार द्वारा की गई मान्यता यह है ।कि वहां पर सच्चे दिल से अराधना करने पर मनोकामना पूर्ण होती शंकर लाल जी पंडित जी के बाद दिवंगत रघुनंदन त्रिवेदी जी ने भी उसी प्रकार की साधना वर्षों तक की दुर्गा सप्तशती पाठ किस प्रकार से करना चाहिए यह जानकारी उनके द्वारा नई पीढ़ी को दी जाती रही.
उनके पुत्र देवेंद्र त्रिवेदी एवं दीपक त्रिवेदी बताते हैं ,कि आखिरी समय तक उनकी नित्य पूजा पाठ क्रिया पहले जैसी ही चलती रही उन्होंने कभी धन वैभव का लालच नहीं किया जबकि उस वक्त जब क्षेत्र में यज्ञाचार्य एवं कर्मकांड करने वाले पंडितों की बहुत कमी थी ।उस वक्त भी उन्होंने धन वैभव की ओर ध्यान न देते हुए वास्तविक धर्म को ही महत्व दिया 85 वर्ष की उम्र पार कर चुके दिवंगत पंडित रघुनंदन त्रिवेदी कुछ दिनों पूर्व ही दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि का विधान वीडियो के माध्यम से श्रद्धालुओं की कामना पर बात कर गए उनके निधन पर बागली सर्व ब्राह्मण समाज के साथ-साथ नगर में दुख है। उनकी अंतिम यात्रा उनके गृह निवास से दोपहर 1 बजे बागली मुक्तिधाम के लिए निकलेगी जहां पंडित कर्म अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बहुत कम लोग जानते हैं, कि बागली में राजराजेश्वरी मंदिर की स्थापना त्रिवेदी परिवार के वरिष्ठ गौरी शंकर जी त्रिवेदी द्वारा की गई थी। दिवंगत पंडित जी के भतीजे स्वर्गीय जगदीश त्रिवेदी बागली नगर परिषद में लेखपाल के रूप में कार्यरत रहे।
