बागली। श्राद्ध पक्ष में ही मालवा तथा निर्माण क्षेत्र में लोक देवी सजां माता की पूजा प्रतिदिन गोबर से बनी नई-नई आकृति के साथ की जाती है। बागली नगर में और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में शाम होते ही सजां माता के कर्ण प्रिय मालवी भाषा वाले गीत सुनाई देते हैं। बुजुर्ग महिलाएं बताती है कि श्राद्ध पक्ष के 16 दिन आत्माओं के विचरण के दिन होते हैं। प्रदोष काल के बाद से इन आत्माओं की शक्ति बढ़ जाती है जो सुबह 4 बजे तक रहती है ऐसी स्थिति में सजां माता की आराधना और पूजा की जाती है जिससे बुरी आत्माएं घर के आसपास तक नहीं भटकती कुंवारी लड़कियां विशेष कर इस पर्व में शामिल होती है उनके मुख से गाए मालवी भाषा के गीत भक्ति और मनोरंजन से जुड़े रहते हैं।
सभी लड़कियों की रक्षा भी 16 दिन तक सजां माता करती है। बागली नगर में शाम होते ही गलियों में इस प्रकार के मालवी गीत की आवाज सुनाई देती है आधुनिकता के दौर में गोबर की जगह पेपर पर बनी संजां माता की पूजा प्रचलन बड़ा है। वार्ड क्रमांक 10 के सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कारपेंटर ने बताया कि उनके मोहल्ले में 16 दिन के सजां पर्व को उत्साह के रूप में मनाया जाता है। कुंवारी लड़कियों के साथ-साथ वार्ड की महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल होकर इस पर्व को गीत गाकर ख़ुशी मना कर माना रही है। और 16 दिन तक अलग-अलग आकृति बनाई जाती है, आखिरी दो दिन में सजां माता को फूल और चमकीली। पन्नियो से सजाया जाता है।
