एनसीएल मुख्यालय के गेटों पर तालाबंदी

सिंगरौली । मोरवा विस्थापन की मांगों को लेकर आज बुधवार को एनसीएल मुख्यालय घेराव आंदोलन में भारी जनसमर्थन देखने को मिला। सुबह से ही मोरवा का बाजार बंद रहा। फल, सब्जी और कई मेडिकल स्टोर सहित आवश्यक सामग्री से जुड़ी दुकानें भी बंद रहीं। आलम यह था कि व्यापारियों ने आंदोलन को समर्थन देते हुए इसमें बढ़-चढ़कर भागीदारी की। आंदोलन के आयोजकों के अनुसार सुबह करीब 10 बजे तक हजारों की संख्या में लोग एनसीएल मुख्यालय के समक्ष पहुंच गए। इस आंदोलन की सबसे खास बात यह रही कि मोरवा विस्थापन से जुड़े विभिन्न मंच संयुक्त मंच के बैनर तले एक साथ दिखाई दिए। अलग-अलग मंचों की ओर से लंबे समय से उठाई जा रही पुनर्वास, मुआवजा और आर एंड आर की मांगों को लेकर सभी ने सामूहिक रूप से आवाज बुलंद की। मंच पर विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े नेता, जनप्रतिनिधि और विस्थापन मंचों के पदाधिकारी भी एक साथ नजर आए। आंदोलन से पहले विभिन्न विस्थापन मंचों ने संयुक्त रूप से एनसीएल मुख्यालय के घेराव का ऐलान किया था। इससे पहले आयोजित आम सभा में भी सभी मंचों ने एकजुट होकर पुनर्वास एवं विस्थापन से जुड़ी मांगों को प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया था। वहीं आंदोलन के दौरान पूर्व विधायक रामलल्लू वैश्य भी मंच पर पहुंचे। उन्होंने विस्थापितों की मांगों का समर्थन करते हुए एनसीएल प्रबंधन की विस्थापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और उनके अधिकारों को सुनिश्चित किए जाने की बात कही।

पुनर्वास और मुआवजा बना आंदोलन का मुख्य मुद्दा

विस्थापितों की प्रमुख मांगों में उचित पुनर्वास, मुआवजा निर्धारण में पारदर्शिता, आर एंड आर के लाभ, विस्थापन कार्ड, गणना पत्रक, भूमि एवं परिसंपत्तियों के मूल्यांकन सहित दस्तावेजी प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग शामिल है। संयुक्त मंच की ओर से कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण के साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। विस्थापन मंचों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि मोरवा के प्रभावित परिवारों की सामूहिक आवाज है। सभी मंचों के एक साथ आने के बाद अब पुनर्वास, मुआवजा और आर एंड आर से जुड़े मुद्दों को संयुक्त रूप से प्रबंधन के सामने रखा, जहां काफी देर बाद एनसीएल प्रबंधन सामने आकर बातचीत शुरू किया।

गेटों पर तालाबंदी,पुलिस से हुई धक्का-मुक्की

जनसमूह के एनसीएल मुख्यालय पहुंचने के बाद आंदोलनकारियों ने मुख्यालय के सभी गेटों पर तालाबंदी कर दी। मुख्य गेट पर तालाबंदी के दौरान पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। हालांकि बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस को पीछे हटना पड़ा और आंदोलनकारी मुख्यालय के गेटों पर डटे रहे। आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के लिए सिंगरौली पुलिस के करीब 250 जवानों की तैनाती की गई थी। पुलिस बल एनसीएल मुख्यालय के विभिन्न गेटों और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद रहा। प्रशासन की ओर से प्रयास रहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

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