नयी दिल्ली, 29 सितंबर (वार्ता) नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने जायरोप्लेन के पायलट के लिए पाठ्यक्रम जारी कर दिया है। जायरोप्लेन ऐसे विमान हैं जिनमें लिफ्ट के लिए एक रोटर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है जबकि आगे बढ़ने के लिए जरूरी थ्रस्ट के लिए प्रोपेलर होते हैं। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से जॉयराइड, हवाई यात्रा के अनुभव और खेतों में छिड़काव, बैनर लहराने, निगरानी तथा सर्वेक्षण जैसी गतिविधियों के लिए किया जाता है।
डीजीसीए ने इसके लिए एक नया सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (सीएआर) जारी किया है। इसमें जायरोप्लेन के पायलट लाइसेंस के लिए ग्राउंड और फ्लाइंग ट्रेनिंग सिलेबस के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके साथ ही नियामक ने देश में जायरोप्लेन की शुरुआत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। सिलेबस जारी होने के बाद अब इसके लिए पायलट प्रशिक्षण संस्थान भी शुरू हो सकेंगे या हेलीकॉप्टर तथा फिक्स्ड विंग विमानों के लिए पहले से मौजूद पायलट प्रशिक्षण संस्थान पाठ्यक्रम शुरू कर सकेंगे। सिलेबस में पायलट लाइसेंस के लिए थ्योरी के अलावा 40 उड़ानों का अनुभव अनिवार्य है। इसमें 16 उड़ानों में विमान का नियंत्रण प्रशिक्षु के हाथ में होगा।

