नयी दिल्ली, 29 सितंबर (वार्ता) नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापू राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि भारत का विमानन क्षेत्र पिछले एक दशक में काफी तेजी से बढ़ा है और इसे देखते हुए उन्होंने दुनिया के दूसरे देशों को इस विकास गाथा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
श्री नायडू ने अगले साल 16-18 मार्च तक यहां आयोजित होने वाले रूट्स एशिया 2027 के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रवासी लोग भारत के हैं। लगभग 3.4 से 3.5 करोड़ प्रवासी भारतीय 200 से अधिक देशों में फैले हुए हैं। अकेले दक्षिण-पूर्व एशिया में 60 से 70 लाख भारतीय हैं। इसे देखते हुए भारत से और भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने रूट्स एशिया के बारे में कहा, “यह भारत की ओर से वैश्विक विमानन उद्योग को एक निमंत्रण है कि वे भारत से जुड़ें, भारत में उड़ान भरें और भारत के साथ मिलकर तरक्की करें।” उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ सबसे बड़े विमानन बाजार का नेतृत्व ही नहीं करना चाहता, बल्कि एशिया और उससे परे विमानन क्षेत्र का स्वरूप तय करने भागीदार भी बनना चाहता है।
इस कार्यक्रम में 115 से अधिक विमान सेवा कंपनियों और 55 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा, 2,500 से अधिक द्विपक्षीय बैठकों की भी संभावना है। केंद्रीय मंत्री ने पिछले एक दशक में देश के विमानन क्षेत्र में हुई प्रगतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार देश को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बनाने के मिशन पर काम कर रही है। उसका लक्ष्य साल 2047 तक यात्रियों की संख्या को लगभग छह गुना बढ़ाकर 130 करोड़ करना है। परिचालनरत हवाई अड्डों की संख्या को भी लगभग तीन गुना करना है – यानी 165 से बढ़ाकर 400 एयरपोर्ट तक ले जाना है।
उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में ‘राजस्व यात्री किलोमीटर’ में औसतन 7.3 प्रतिशत सालाना की दर से वृद्धि हुई है, जबकि ‘उपलब्ध सीट किलोमीटर’ में सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
श्री नायडू ने भारत की ब्राजील, अजरबैजान और उज्बेकिस्तान के साथ उड़ानों की संख्या में हुई वृद्धि और इंडोनेशिया के साथ सीटों की संख्या बढ़ाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “हमने इंडोनेशिया, मलेशिया, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम जैसे देशों के साथ और अधिक शहरों को नेटवर्क में जोड़कर बाजारों का विस्तार किया है।” उन्होंने बताया कि 2016 से 2026 के बीच हांगकांग और हैदराबाद के बीच, बेंगलुरु और बैंकॉक के बीच तथा कुआलालंपुर और चेन्नई के बीच यात्री ट्रैफिक दोगुना हो गया है।
‘उड़ान’ योजना और हब एंड स्पोक मॉडल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज भारतीय विमानन क्षेत्र में मांग ज्यादा है और आपूर्ति कम। एयरलाइंस के लिए इसका मतलब है बड़े बाजार तक पहुंच, बेहतर संपर्क और अपने परिचालन में अधिक राजस्व की संभावना। उन्होंने कहा, “आज भारत यही अवसर दे रहा है। ज्यादा शहर, ज्यादा यात्री, ज्यादा रूट और ज्यादा बाजार।” केंद्रीय मंत्री ने उम्मीद जताई कि ‘रूट्स’ से भारत के लिए नए रूट, नई साझेदारियां और नए संपर्क के द्वार खुलेंगे।
इस अवसर पर नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा, एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए रूट्स के निदेशक संजय जयंत और विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव पी.एस. गंगाधर ने भी अपने विचार रखे।

