उत्तरकाशी में चलाए गए सफल रेस्क्यू ऑपरेशन, कालिंदी खाल और माउंट जोगिन से सभी ट्रेकर्स सुरक्षित बाहर निकाले गए

उत्तरकाशी (उत्तराखंड), उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चलाए गए बचाव अभियानों में प्रशासन को बड़ी सफलता मिली है। कालिंदी खाल ट्रैक पर पिछले कई दिनों से खराब मौसम और भारी बर्फबारी के बीच फंसे सभी 19 ट्रेकर्स को मंगलवार को पूरी तरह सुरक्षित निकाल लिया गया है। इसके साथ ही, माउंट जोगिन-1 क्षेत्र से भी सभी पर्वतारोही और सपोर्टिंग स्टाफ को हेलीकॉप्टर के माध्यम से सकुशल हर्षिल हेलीपैड पहुंचा दिया गया है। इस कठिन और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन को राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), आईटीबीपी और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने बेहतरीन तालमेल के साथ पूरा किया।

हर्षिल हेलीपैड पर बनाई गई थी विशेष कार्ययोजना, रेकी के बाद ड्रोन और हेलीकॉप्टरों की मदद से चला अभियान

इससे पहले जिला प्रशासन द्वारा हर्षिल हेलीपैड पर उच्च अधिकारियों और बचाव दलों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर विस्तृत रणनीति तैयार की गई थी। मौसम की अनिश्चितता, अत्यधिक ठंड और शून्य से नीचे के तापमान को देखते हुए टीमों ने चरणबद्ध तरीके से अभियान को आगे बढ़ाया। माउंट जोगिन क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का जायजा लेने के लिए एसडीआरएफ के जवानों को पहले ही रेकी के लिए रवाना किया गया था, ताकि सुरक्षित मार्ग तलाश कर फंसे हुए लोगों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जा सके। इससे एक दिन पहले ओडेन कोल पास से भी 29 ट्रेकर्स को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनका स्वास्थ्य परीक्षण भी पूरी तरह सामान्य पाया गया है।

प्रशासन ने जारी की सख्त एडवाइजरी, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों और ट्रेकिंग दलों से एहतियात बरतने की अपील

सफल रेस्क्यू के बाद सभी सुरक्षित ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों को हर्षिल लाकर प्राथमिक उपचार और मेडिकल चेकअप के बाद उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। इस सफल अभियान के बाद उत्तराखंड प्रशासन ने राहत की सांस ली है। हालांकि, लगातार बिगड़ते मौसम और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हो रही भारी बर्फबारी को देखते हुए जिला प्रशासन ने पर्यटकों, ट्रेकर्स और ट्रैवल एजेंसियों के लिए एक सख्त एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने अपील की है कि बिना पूरी तैयारी, मजबूत साजो-सामान और आधिकारिक अनुमति के उच्च ऊंचाई वाले ट्रेक पर जाने से बचें, ताकि किसी भी आपात स्थिति और जानमाल के नुकसान से बचा जा सके।

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