
दमोह। न्यायालय उदय सिंह मरावी, विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) में आरोपी शुभम राठौर पिता परषोत्तम राठौर, आयु- 22 वर्ष व शोभित राठौर उर्फ कुक्की पिता दुलीचंद राठौर, आयु- 25 वर्ष दोनों निवासी- खजरी मोहल्ला, सिविल वार्ड नंबर-09, थाना- दमोह कोतवाली को न्यायालय द्वारा दोनों आरोपियों को भादवि की धारा 302/34 में आजीवन कारावास व 1000-1000 रुपये अर्थदंड और धारा 3(2)(v) एस.सी./एस.टी. (अत्याचार निवारण) अधिनियम में आजीवन कारावास व 1000-1000 रुपये अर्थदंड व आरोपी शुभम राठौर को अतिरिक्त धारा 201 भादवि में 2 वर्ष का कठोर कारावास व 200 रुपये अर्थदंड से दण्डित किया गया। मामले में पैरवी सहायक निदेशक अभियोजन धर्मेन्द्र सिंह तारन के मार्गदर्शन में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी सतीश कपस्या, दमोह द्वारा की गई व सहायक तरुण कुमार सोनी द्वारा आवश्यक सहयोग किया गया। साथ ही इस पूरे घटना की विवेचना तत्कालीन सीएसपी अभिषेक तिवारी द्वारा की गई थी।
अभियोजन का प्रकरण संक्षेप में इस प्रकार है कि 19 मार्च को थाना कोतवाली, जिला दमोह में मर्ग क्रमांक 00/2024 धारा 174 द.प्र.सं. पर सूचना प्राप्त हुई कि खजरी मोहल्ला में परषोत्तम राठौर के घर के सामने एक व्यक्ति की लाश पड़ी है। मृतक की पहचान लब्बू राय उर्फ सुरेन्द्र राय के बेटे अंकेश उर्फ अंकू राय (अनुसूचित जाति) के रूप में हुई। मर्ग जांच में स्पष्ट हुआ कि घटना दिनांक 18 मार्च 2024 व 19 मार्च 2024 की दरम्यानी रात करीब 2 बजे की है। मृतक अंकेश उर्फ अंकू राय किसी से मिलने के लिए उसके छत पर गया था, तो वहां पर आरोपी शुभम राठौर व उसके चचेरे भाई शोभित राठौर ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ मारपीट कर उसे छत के ऊपर से नीचे फेंक दिया और बाद में नीचे आकर गैस के सिलेण्डर से सिर पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। उसके सिर में गंभीर चोट आकर मांस बाहर निकल आया था। उक्त तथ्यों के आधार पर थाना कोतवाली दमोह में अपराध क्रमांक 232/2024 धारा- 302/34, 323, 201 भादंवि एवं धारा- 3(2)(v), 3(2)(v-a) अजा/अजजा अधिनियम के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार कर मेमोरेण्डम कथन लिए गए तथा सम्पूर्ण विवेचना उपरांत अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।न्यायालय में आई मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट व परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर विश्वास करते हुए तथा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्कों के आधार पर माननीय न्यायालय ने आरोपीगण को आजीवन कारावास से दंडित किया।
