
ग्वालियर। मध्य भारतीय हिंदी साहित्य सभा एवं जीवाजी विश्वविद्यालय की भाषा अध्ययनशाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिंदी पखवाड़े का समापन सोमवार को गालव सभागार में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संरक्षक श्रीधर पराड़कर रहे, जबकि अध्यक्षता प्रभारी कुलगुरु प्रो. विवेक बापट ने की।
मुख्य वक्ता श्रीधर पराड़कर ने कहा कि अपनी भाषा पर अभिमान होना चाहिए, क्योंकि चेतना और चिंतन मातृभाषा में ही संभव है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर वर्तमान तकनीकी युग तक हिंदी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। प्रभारी कुलगुरु प्रो. विवेक बापट ने हिंदी को सरल और अपनी पहचान बताया, वहीं कुलसचिव डॉ. राजीव कुमार मिश्रा ने हिंदी पखवाड़े के संदेश को निरंतर बनाए रखने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में आयोजित काव्य संध्या में कवियों ने राष्ट्र एवं संस्कृति पर रचनाएं प्रस्तुत कीं। इसके बाद पखवाड़े के दौरान आयोजित निबंध, काव्य लेखन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के विजेताओं (कृष्णा शर्मा, मनु अवस्थी, वर्षा दंडोतिया, नेहा शर्मा आदि) को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।
