
सिंगरौली । मोरवा विस्थापन के मुद्दे को लेकर पूर्व विधायक रामलल्लू बैस ने एनसीएल प्रबंधन पर निशाना साधा है। विस्थापन को लेकर आयोजित चर्चा में उन्होंने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसकी तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से की और प्रबंधन पर तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनके ये आरोप उनके द्वारा व्यक्त किए गए विचार हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में जिस तरह विस्थापित परिवारों को लाभ दिया गया था, उसी आधार पर वर्तमान विस्थापन में भी शास. भूमि और पट्टेधारकों को समान मुआवजा मिलना चाहिए। उनके अनुसार, विस्थापन की प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। साथ ही पूर्व विधायक ने कहा कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए जगह का चयन और निर्धारण अति शीघ्र किया जाना चाहिए। साथ ही विस्थापन के मुद्दे पर राजनीतिक नेतृत्व को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि नेताओं द्वारा प्रभावित लोगों को अपना वोट बैंक समझने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए और कहा कि विस्थापित परिवारों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सभी मंचों के एकजुट होने पर जताई खुशी
मोरवा विस्थापन को लेकर अलग-अलग मंचों के एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने पर उन्होंने खुशी जताई। उन्होंने स्थानीय लोगों से आगामी 30 सितंबर को प्रस्तावित आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। गौरतलब है कि मोरवा विस्थापन से जुड़े विभिन्न मंचों ने 30 सितंबर को एनसीएल मुख्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। सिंगरौली पुनर्वास मंच सेवा समिति की ओर से भी एनसीएल प्रबंधन एवं प्रशासन को इसकी सूचना दी जा चुकी है। मोरवा क्षेत्र में विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे पहले भी सार्वजनिक तौर पर उठते रहे हैं और रामलल्लू वैश्य पूर्व में भी विधानसभा में सिंगरौली के विस्थापितों तथा एनसीएल से जुड़े मामलों पर अपनी बात रख चुके हैं।
