न्यूयॉर्क, 27 सितंबर (वार्ता) सऊदी अरब ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और खतरों को अंतरराष्ट्रीय शांति, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के लिए जोखिम बताते हुए खाड़ी देशों तथा महत्वपूर्ण जलमार्गों की सुरक्षा के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने सऊदी सुरक्षा संसाधनों और नागरिक एवं आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाये जाने वाले ‘ईरानी हमलों’ की निंदा की तथा अपनी संप्रभुता, नागरिकों और राष्ट्रीय संसाधनों की रक्षा के अधिकार पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पूरे क्षेत्र और दुनिया की सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता खाड़ी की स्थिरता से सीधे जुड़ी है।
प्रिंस फैसल ने होर्मुज जलडमरूमध्य, बाब अल-मंदेब, लाल सागर और अदन की खाड़ी सहित महत्वपूर्ण जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष को इन जलमार्गों का इस्तेमाल दबाव, धमकी या दूसरे देशों के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं करना चाहिए। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में 28 फरवरी से पहले की स्थिति बहाल करने की भी अपील की।
उन्होंने क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कतर और पाकिस्तान सहित विभिन्न देशों के कूटनीतिक एवं मध्यस्थता प्रयासों का समर्थन किया और कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था व्यापक, प्रभावी और टिकाऊ होनी चाहिए।
फिलिस्तीन के मुद्दे पर उन्होंने गाजा और पश्चिमी तट में नागरिकों को निशाना बनाए जाने, मानवीय सहायता में बाधा तथा जबरन विस्थापन और बस्तियों के विस्तार की निंदा की। उन्होंने 1967 की सीमाओं पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र के साथ दो-राष्ट्र समाधान के लिए सऊदी समर्थन दोहराया।
यमन के संबंध में प्रिंस फैसल ने व्यापक राजनीतिक समाधान का आह्वान किया और कहा कि सऊदी अरब ने देश को 29 अरब डॉलर से अधिक की मानवीय एवं विकास सहायता दी है। उन्होंने हूती आंदोलन के मिसाइल और ड्रोन हमलों की भी निंदा की और कहा कि इससे लाल सागर तथा बाब अल-मंदेब में नौवहन की स्वतंत्रता प्रभावित होती है। सूडान पर उन्होंने कहा कि संघर्ष का समाधान सूडानी पक्षों के बीच समझौते, राज्य संस्थाओं को मजबूत करने और मानवीय जरूरतों को पूरा करने से ही संभव है। उन्होंने सीरिया पर अमेरिकी प्रतिबंध हटाने का स्वागत किया तथा लेबनान और इराक में हथियारों पर राज्य के नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रिंस फैसल ने सऊदी अरब के ‘विजन 2030’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे देश निवेश, पर्यटन, उद्योग, प्रौद्योगिकी और लॉजिस्टिक्स का क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे, वैकल्पिक ऊर्जा, स्वच्छ हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर और अन्य तकनीकों में निवेश का भी उल्लेख किया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में उन्होंने जिम्मेदार उपयोग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल मानव विकास में योगदान के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान कोई एक देश अकेले नहीं कर सकता और वैश्विक सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों तथा अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान आवश्यक है।
