गुना। गुलाबगंज निवासी 26 वर्षीय महिला की बीमारी से मौत के बाद परिजनों ने निजी अस्पताल में जमकर हंगामा किया। इसके बाद शहर के जज्जी बस स्टैंड रोड पर चक्काजाम कर दिया।जानकारी के मुताबिक राजकुमारी ओझा (26) निवासी ग्राम भादौर, हाल निवासी गुलाबगंज कैंट को बुखार, सीने में दर्द, उल्टी और घबराहट जैसी गंभीर समस्याओं के चलते 18 सितंबर को बालाजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक, डॉ. आरबी धाकड़ की देखरेख में इलाज के नाम पर मरीज को 4 यूनिट खून चढ़ाया गया और फिर यह कहकर 21 सितंबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई कि मरीज बिल्कुल स्वस्थ है। लेकिन कुछ ही दिन बाद 26 सितंबर को राजकुमारी की तबीयत दोबारा अचानक बिगड़ गई। जब परिजन उन्हें तुरंत बालाजी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, तो चिकित्सक ने स्थिति की गंभीरता को समझे बिना यह कहकर वापस लौटा दिया कि बॉडी टेम्परेचर ज्यादा है, कोई समस्या नहीं है, घर ले जाएं।
लापरवाही का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। अगले ही दिन यानी रविवार 27 सितंबर की सुबह राजकुमारी को फिर से गंभीर घबराहट और तकलीफ शुरू हुई। परिजन आनन-फानन में मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन आरोप है कि तड़पती हुई महिला को लेकर वे डेढ़ घंटे तक अस्पताल के बाहर ही बैठे रहे और किसी ने अंदर से दरवाजा तक नहीं खोला। काफी देर बाद जब चिकित्सक ने बाहर आकर देखा, तो सीधे मृत घोषित कर दिया और फौरन अस्पताल के गेट बंद करवा दिए।
अपनों की आँखों के सामने इस तरह इलाज के अभाव में दम तोड़ती राजकुमारी को देखकर परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने बलपूर्वक अस्पताल का गेट तोड़ दिया और भीतर घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद पूरा अस्पताल स्टाफ अपनी जान बचाकर भाग निकला। इसके बाद आक्रोशित परिजनों ने महिला के शव को अस्पताल से कुछ ही दूरी पर स्थित जज्जी बस स्टैंड रोड पर रखकर चक्काजाम कर दिया। सड़क पर शव रखकर हुए इस हंगामे से यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
हंगामे की सूचना मिलते ही सीएसपी, नायब तहसीलदार और पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने शोकसंतप्त परिजनों को समझा-बुझाकर शांत किया और जिला प्रशासन की तरफ से निष्पक्ष पोस्टमार्टम कराने के बाद डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद जाकर जाम खुल सका।
मृतका के जेठ प्रदीप ओझा ने रोते-बिलखते हुए यह भी आरोप लगाया कि राजकुमारी का आयुष्मान कार्ड का पूरा कोटा इस्तेमाल करने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उनसे इलाज के एवज में 1 लाख रुपए नकद भी ऐंठे थे। कुल 5 लाख रुपए उपचार में खर्च होने की बात कही जा रही है। मृतका के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनके अनाथ होने का जिम्मेदार परिजन अस्पताल के परिजनों में आक्रोश व्याप्त है और चिकित्सक पर एफआईआर की मांग पर अड़े हुए हैं।
