नयी दिल्ली, 25 सितंबर (वार्ता) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विशेषरूप से सीमावर्ती तथा हिमालयी क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार को जरूरी बताते हुए कहा है कि विकास के साथ ही पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
श्री यादव ने पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया (पीएएफआई) के दो दिन तक चले 13वें वार्षिक फोरम के आखिरी दिन ‘भारत की हरित विकास यात्रा : स्थिरता, प्रतिस्पर्धा और वैश्विक नेतृत्व’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए शुक्रवार को यहां कहा कि सीमा क्षेत्रों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं लेकिन पर्यावरणीय संरक्षण का दायरा बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रीय उद्यानों की संख्या 103 से बढ़कर 106 हो गयी है, बाघ अभयारण्यों का विस्तार किया गया है और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की सीमाएं स्पष्ट की गयी हैं। देश के 23 प्रतिशत हिस्से में वन क्षेत्र और चार प्रतिशत हिस्से में जल निकाय हैं।
केंद्रीय मंत्री ने उद्योगों से नये प्रयोग, शोध और पर्यावरण अनुकूल समाधानों पर ध्यान देने का आग्रह करते हुए ई-कचरे, निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे, इस्तेमाल किए गए तेल, सीसा एवं बैटरी कचरे तथा एस्बेस्टस सहित करीब 18 क्षेत्रों के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़े नियम बनाये गये हैं। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले पर्यावरण मंजूरी में 600 दिन से अधिक लगते थे जबकि अब यह अवधि 100 दिन से कम रह गयी है।
जलवायु कार्रवाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत स्थानीय स्तर पर काम करने, देश में इसके सकारात्म्क परिणाम देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तीन आधारों पर काम कर रहा है। उनका कहना था कि भारत और स्वीडन ने लीडआईटी की स्थापना की है जबकि भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (सीडीआरआई) की शुरुआत की है। आईएसए में अब 137 देश शामिल हैं और दोनों पहलों का मुख्यालय भारत में है।
वन्यजीव संरक्षण पर उन्होंने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए कच्छ में ऊंचा फीडिंग सेंटर बनाया गया है और गिद्ध संरक्षण के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्य एशियाई फ्लाईवे के प्रमुख क्षेत्र के रूप में भारत यूरेशिया, पूर्वी एशिया और मंगोलिया से आने वाले प्रवासी पक्षियों के आवास क्षेत्रों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
