
जबलपुर। हाईकोर्ट के आदेश से प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को सेवा लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इनमें 35 हजार प्राथमिक, 20 हजार माध्यमिक व 15 हजार उच्च माध्यमिक शिक्षक शामिल हैं। कोर्ट ने पूर्व में दिए आदेश के पालन के लिए राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। मामला शिक्षकों की संविलियन से पहले की सेवा को पहली नियुक्ति की तारीख से जोड़ने से संबंधित है। सेवा अवधि जुड़ने पर वेतन निर्धारण, वरिष्ठता, वेतनवृद्धि और पेंशन सहित अन्य लाभों पर असर पड़ेगा। मामले की शुरुआत 497 शिक्षकों की याचिका से हुई थी। शिक्षकों ने दलील दी थी कि उनकी पहली नियुक्ति से चली आ रही सेवा को संविलियन के बाद सेवा लाभों की गणना में शामिल किया जाए।
हाईकोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 24 अगस्त 2026 को एसएलपी खारिज हो गई। इसके बाद शिक्षकों ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर आदेश का पालन कराने की मांग की। सुनवाई के दौरान सरकार ने अनुपालन के लिए समय मांगा। कोर्ट ने चार सप्ताह की मोहलत दी है। न्यायमूर्ति दीपक खोट की एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में नियत की है। शिक्षक संगठनों के अनुसार सेवा अवधि जुड़ने से कई शिक्षकों के वेतन में करीब 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह तक का अंतर आ सकता है। साथ ही छठे वेतनमान से जुड़े करीब 10 वर्ष के एरियर का लाभ भी मिल सकता है। हालांकि वास्तविक राशि प्रत्येक शिक्षक की नियुक्ति तिथि और सेवा अभिलेख के आधार पर तय होगी।
