मतदाता सूची में बदलाव के खिलाफ कांग्रेस का प्रदेशव्यापी आंदोलन

भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत मतदाता सूचियों में हुए बदलाव को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। कांग्रेस ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है।

भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस लगातार मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाती रही है। उन्होंने मांग की कि प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए नामों का विधानसभा क्षेत्रवार और बूथवार विवरण सार्वजनिक किया जाए।

पटवारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में प्रकाशित प्रारूप सूची के दौरान 42 लाख 74 हजार 160 नामों से संबंधित जानकारी या फॉर्म उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने बताया कि फरवरी 2026 में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 5 करोड़ 39 लाख 81 हजार 65 मतदाता दर्ज हुए, जबकि 34 लाख 25 हजार 78 नाम हटाए गए।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि हटाए गए नामों में कितने लोगों की मृत्यु हो चुकी थी, कितने मतदाता दूसरे स्थानों पर चले गए थे और कितने नाम डुप्लीकेट होने के कारण हटाए गए। उन्होंने बाद में बहाल किए गए नामों की जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग की।

जीतू पटवारी ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए और वर्ष 2023 में निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में किए गए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही कहा कि जहां आपराधिक अनियमितता प्रमाणित हो, वहां एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।

28 और 29 सितंबर को कांग्रेस का प्रदर्शन
पटवारी ने घोषणा की कि कांग्रेस कार्यकर्ता 28 सितंबर को भोपाल स्थित राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय का घेराव करेंगे। इसके अगले दिन, 29 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर कलेक्टर कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।

कांग्रेस ने आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने की भी मांग रखी है।

पटवारी ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता बूथ स्तर पर मतदाता सूचियों का सत्यापन करेंगे और वास्तविक मतदाताओं को नाम, पंजीकरण और अन्य समस्याओं के समाधान में मदद करेंगे।

कांग्रेस की ओर से घोषित आंदोलन अब मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नामों के हटाए जाने और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस का एक प्रमुख मुद्दा बन गया है।

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