भोपाल। 21 साल से लंबित मास्टर प्लान का रास्ता अब साफ होता दिख रहा है। 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने और दावे-आपत्तियां बुलाने की अनुमति दे दी है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या ये मास्टर प्लान 2026 के भोपाल की जरूरतों को पूरा कर पाएगा?
खासकर तब, जब रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सीलिंग की कार्रवाई जारी है।
भोपाल में मास्टर प्लान का इंतजार करीब 21 साल से है। 22 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद अब सरकार ड्राफ्ट जारी कर सकती है, लेकिन अंतिम मास्टर प्लान लागू करने से पहले इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखनी होगी।
इससे यह तो साफ है कि मास्टर प्लान आने वाला है. ऐसे में हमने लोगों से उनकी राय जानी कि मास्टर प्लान के आने के बाद भोपाल की कितनी जरूरते पूरी होंगी.
युवाओं और व्यापारियों का मानना है कि लंबे वक्ता बाद आने वाले मास्ट प्लान से भोपाल की तस्वीर में बदलाव सुनिश्चित है। लेकिन सवाल यह भी है कि मास्टर प्लान आने के बाद क्या भोपाल की जरूरतें पूरी होंगी। क्या मौजूदा सीलिंग कार्रवाई पर रोक लग जाएगी।
एक्सपर्ट के मुताबिक, अभी ड्राफ्ट लाने का प्रकरण जारी है और मास्टर प्लान को लागू होने में करीब 6 महीने का समय लग सकता है। इसलिए अभी ये बता पाना मुश्किल है कि इसमें क्या-क्या बदलाव होंगे।
रिटायर्ड एडीएम जी.पी माली के मुताबिक, मास्टर प्लान आने के बाद भी सीलिंग की कार्रवाई पर रोक नहीं लगेगी। जिन दुकानों को नोटिस मिल चुका है या जिन पर कार्रवाई हो चुकी है, उन्हें सिर्फ मास्टर प्लान आने से राहत नहीं मिलेगी।
मास्टर प्लान का ड्राफ्ट आएगा, दावे-आपत्तियां भी होंगी…
लेकिन भोपाल के व्यापारियों और रहवासियों को इसका असर कब और कितना मिलेगा—इसका जवाब अभी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
