सिंधी विस्थापितों को आवंटित हुए थे 100 प्लाट, 52 पर 35 साल से कब्जा नहीं मिला

जबलपुर: भोपाल में सिंधी विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए आवंटित 100 प्लाटों में से 52 पर करीब 35 साल से कब्जा नहीं मिलने और लीज नवीनीकरण के नाम पर 2.54 करोड़ रुपये का शमन शुल्क मांगने के मामले में हाई कोर्ट ने राज्य शासन सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकल पीठ ने नगर सुधार समिति, गांधी नगर की याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया।
याचिका में बताया गया कि शासन ने 1984 से 1988 के बीच ग्राम बेहटा, वन ट्री हिल्स, बैरागढ़ में 100 प्लाट आवंटित किए थे। अक्टूबर
1988 में कलेक्टर भोपाल ने समिति के पक्ष में रजिस्टर्ड लीज डीड भी निष्पादित की थी। समिति का कहना है कि 1990 से 52 प्लाट और कम्युनिटी हाल की जमीन पर अतिक्रमणकारियों व झुग्गी वासियों का कब्जा है। केवल 48 प्लाटों का कब्जा सदस्यों को मिला। कब्जा और लीज नवीनीकरण के लिए समिति
ने 1997 और 2023 में हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। पूर्व आदेशों में कलेक्टर को अतिक्रमण हटाकर कब्जा दिलाने तथा लीज नवीनीकरण आवेदन का
निराकरण करने के निर्देश दिए गए थे। याचिका के अनुसार जून 2023 में 3.75
लाख रुपये प्रीमियम और 18 हजार रुपये ग्राउंड रेंट मांगा गया था। बाद में एसडीओ राजस्व ने 6 मार्च, 2026 और कलेक्टर ने 13 मार्च 2026 को 2, 53, 39, 950 रुपये शमन शुल्क मांगते हुए सामान्य लीज नवीनीकरण से इंकार कर दिया। समिति ने दोनों अधिकारियों के आदेश सहित दो जनवरी, 2024 के आदेश को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, प्रतीक दुबे, शिवम शर्मा और जितेंद्र गर्ग ने पक्ष रखा।

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