
नई दिल्ली, कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भारतीय चुनाव आयोग के भीतर कथित तौर पर मचे आंतरिक असंतोष को लेकर केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाते हुए कहा है कि संस्था की स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता खत्म हो चुकी है.उल्लेखनीय है कि यह पूरा विवाद एक अखबार में छपी खोजी रिपोर्ट के बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि देश के दो अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया और फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं.
इस खुलासे को आधार बनाकर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पहले ही सोशल मीडिया पर कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने आयोग की शुचिता को खत्म कर दिया है.उसके बाद सिंघवी ने जानकारी को आधार बनाकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त और संवैधानिक संस्था को पूरी तरह से हाईजैक कर लिया गया है और वहां तानाशाही तरीके से बुलडोजर चलाया जा रहा है, जिससे संस्था की स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता खत्म हो चुकी है. सिंघवी ने आंतरिक दस्तावेजों और रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार आयोग के अन्य सदस्यों को गुमराह कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है, जहां सभी निर्णय सर्वसम्मति या बहुमत से सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए. परंतु मुख्य चुनाव आयुक्त खुद को पूरी संस्था से ऊपर मानकर मनमाने फैसले ले रहे हैं और वह केवल एक ही व्यक्ति के इशारे पर काम कर रहे हैं. उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि एसआईआर विवाद को लेकर अन्य दो चुनाव आयुक्तों द्वारा लिखित में दर्ज कराई गई 14 गंभीर आपत्तियों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया, जो यह साबित करता है कि आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह खत्म हो चुका है. कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग से दो अन्य आयुक्तों की 14 लिखित आपत्तियों और असहमति पत्रों को तुरंत सार्वजनिक करने की मांग की है. सिंघवी ने 1995 के उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों से ऊपर नहीं हैं, वे सिर्फ समकक्षों में प्रथम हैं. ऐसे में उन्हें संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करना चाहिए.
