फ्रैंकफर्ट 22 सितंबर (वार्ता) महाकवि विद्यापति की स्मृति में जर्मनी में दो दिवसीय विद्यापति समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें सांस्कृतिक धरोहर और मैथिल भाषा-संस्कृति की अनुठी झलक देखने को मिली।
महाकवि विद्यापति की स्मृति और मैथिल संस्कृति, कला और साहित को संरक्षित करने के उदेश्य से इंटरनेशनल मैथिल डायस्पोरा (आईएमडी) की ओर से आयोजित जर्मनी के कोने-कोने से प्रवासी मैथिल समाज के लोग जुटे थे। इस दो दिवसीय समारोह के पहले मिथिला मिलन का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 100 प्रवासियों ने हिस्सा लिया।
सुदूर परदेस में अपनी जडों से जुड़े रहने के उदेश्य से आयोजित इस समारोह के दौरान सभी परिवारों ने एक-दूसरे से आत्मीय मुलाकात की। परस्पर मेल-जोल बढ़ाने, एक-दूसरे का सहयोग करने और अपनी भावी पीढ़ी को मैथिल संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखने का संकल्प लिया।
इस समारोह के दूसरे दिन फ्रैंकफर्ट स्थित भारतीय वाणिज्यिक दूतावास के उप – वाणिज्य दूत राजीव कुमार मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विदेशों में अपनी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने के इस प्रयास की प्रशंसा की और भाषा के क्षेत्र में महाकवि विद्यापति वैश्विक योगदान को रेखांकित किया।
इस समारोह के दौरान मिथिला प्रदर्शनी का भी आयोजित किया गया था, जिसने लोगों को काफी लुभाया। इसमें मिथिला के प्रसिद्ध व्यंजनों, खान-पान की सामग्रियों औरक विशुद्ध मखाने प्रदर्शित किये गये।
