नयी दिल्ली, 22 सितंबर (वार्ता) यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) और सरकार तथा बैंकों के संघ के बीच मंगलवार को यहां हुई वार्ता विफल हो गई जिसके बाद फोरम ने अपने सदस्यों को बताया कि अगले सप्ताह हड़ताल का प्रस्ताव अभी बना हुआ है।
बैंक कर्मचारियों और अधिकारि
यों के सात संगठनों के संयुक्त मंच यूएफबीयू ने आज जारी एक सर्कुलर में बताया कि बैंकों के संगठन इंडियन बैंक एसोसिएशन और केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की तरफ से बैठक में कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उसने अपने सदस्यों से 28, 29 और 30 मई के तीन दिन के प्रस्तावित हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है।
यदि हड़ताल नहीं टली तो लगातार पांच दिन बैंकों में कामकाज बंद रह सकता है। महीने का चौथा शनिवार होने के कारण 26 सितंबर को बैंक बंद रहेंगे। अगले दिन 27 सितंबर को रविवार है। इसके बाद ही तीन की हड़ताल का आह्वान किया गया है। बैंककर्मी पांच दिन का कार्य सप्ताह करने के साथ ही प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना की समीक्षा की भी मांग कर रहे हैं।
यूएफबीयू में एआईबीईए (अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ), एआईबीओसी (अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ), एनसीबीई (राष्ट्रीय बैंक कर्मचारी परिसंघ), एआईबीओए (अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ), बीईएफआई (भारतीय बैंक कर्मचारी महासंघ), आईएनबीईएफ (भारतीय राष्ट्रीय बैंक कर्मचारी महासंघ) और आईएनबीओसी (भारतीय राष्ट्रीय बैंक अधिकारी कांग्रेस) शामिल हैं।
यूएफबीयू ने सातों यूनियनों को जारी सर्कुलर में बताया कि सरकार और आईबीए की तरफ से कहा गया कि पांच दिन के कार्य सप्ताह का प्रस्ताव विचाराधीन है। इस पर सभी हितधारकों की राय लेनी होगी। उन्होंने फोरम से हड़ताल टालने की अपील की।
फोरम के प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों को लेकर कोई ठोस और सकारात्मक प्रगति नहीं होती वे हड़ताल वापस नहीं लेंगे। उन्होंने बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को हड़ताल में शामिल होने से रोकने के लिए बैंकों द्वारा अपनाये जा रहे “अनुचित उपायों” के खिलाफ भी अपना विरोध जताया।
इससे पहले 11 सितंबर को इन्हीं मांगों को लेकर यूएफबीयू के बैनर तले सातों संगठनों ने एक दिन की हड़ताल की थी। हड़ताल काफी सफल रही थी। सार्वजनिक बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया था जबकि निजी बैंकों में कम असर देखने को मिला था। निजी बैंकों के कर्मचारियों में कर्मचारी संघों के सदस्यों की संख्या कम होने के कारण उन पर हड़ताल का प्रभाव कम हो रहा है।
फोरम का कहना है कि तीन दिन की हड़ताल के बाद भी उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
