सेंट्रल कोलफील्ड्स का वार्षिक उत्पादन 12 साल में 75 प्रतिशत बढ़ा, कारोबार में प्रौद्योगिकी का समावेश बढ़ा रही है कंपनी

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (वार्ता) झारखंड के कोयला क्षेत्रों में काम करने वाली कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) का कोयला उत्पादन 12 साल पहले की तुलना में करीब 75 प्रतिशत ज्यादा हो गया है और कंपनी अब कारोबार में कृत्रिम बुद्धमत्ता (एआई) जैसी उन्नत तकनीकों का समावेश कर रही है।।

कोयला मंत्रालय की मंगलवार को जारी एक विज्ञप्ति आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि कोयला क्षेत्र में नीतिगत सुधारों, परियोजनाओं की मंजूरी में तेजी , अवसंरचना विकास, प्रौद्योगिकी अंगीकरण, मशीनीकरण में वृद्धि और दक्षता एवं ऊर्जा सुरक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के कारण 2014 के बाद से महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है। इसका परिणाम कोयला उत्पादन में दिखता है। वित्त वर्ष 2013-14 में पांच करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में 8.75 करोड़ टन हो गया जो उसके लिए तक का सबसे अधिक वार्षिक उत्पादन है।

कंपनी की ओर से इस दौरान अमरापली ( क्षमता 3.5 करोड़ टन वार्षिक), मगध (5.1 करोड़ टन वार्षिक), चंद्रगुप्त ओसीपी (1.5 करोड़ टन वार्षिक) और कोट्रे बसंतपुर पचमो ( क्षमता 50 लाख टन वार्षिक) जैसी बड़ी खदानें विकसित की गई हैं। कारो, कोनार और उत्तरी उरीमारी जैसी वर्तमान खदानों की क्षमता में भी विस्तार किया गया है। कई और नई खदानें और विस्तार परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं और आने वाले वर्षों में इनसे सीसीएल की उत्पादन क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है।

कंपनी ने रेलवे नेटवर्क से सम्पर्क सुविधाओं , कोयला प्रबंधन संयंत्रों (सीएचपी), साइलो, तीव्र लोडिंग प्रणाली और खान से माल डिपो और उठाव केंद्रों तक पहुंचाने की परियोजनाओं में निरंतर निवेश किया है। इसी संबंध में

उत्तरी करणपुरा कोयला क्षेत्रों के लिए तोरी-शिवपुर रेल कॉरिडोर को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। तीन लेन वाले इस रेलवे मार्ग की क्षमता वार्षिक 10 करोड़ टन कोयला ढोने की है । 75 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला उत्तरी उरीमारी सीएचपी पहले ही चालू हो चुका है। विकास के अधीन प्रमुख सीएचपी परियोजनाओं में कोनार (50 लाख टन वार्षिक), केडीएच-पूर्णाडीह (75 लाख टन वार्षिक), अमरापली (2.5 करोड़ टन वार्षिक), कारो (70 लाख टन वार्षिक) और मगध (5.1 करोड़ टन वार्षिक क्षमता) शामिल हैं। ये प्रणालियां सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने, लोडिंग दक्षता में सुधार करने और सीधे रेल निकासी को सुविधाजनक बनाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि सीसीएल ने गुणवत्तापूर्ण घरेलू धुले हुए कोकिंग कोयले की उपलब्धता बढ़ाने पर विशेष बल दिया है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत हो सकेगी। कंपनी प्रति वर्ष 1.45 करोड़ टन (करोड़ टन वार्षिक) की कुल क्षमता वाली पांच नई कोकिंग कोयला वाशरी विकसित कर रही है। इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

मंत्रालय ने कहा है कि सीसीएल अपनी परिचालन निगरानी और प्रबंधन के तरीके को बदलने के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों को भी अपना रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग के अनुरूप, कंपनी ने अपने कमांड क्षेत्रों में सुरक्षा, निगरानी और परिचालन निरीक्षण को मजबूत करने के लिए एक एआई-सक्षम एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) स्थापित किया है। यह केंद्र वास्तविक समय की निगरानी और अधिक प्रभावी निर्णय लेने में सहायता के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करता है।

सीसीएल के पास वर्तमान में 32 मेगावाट से अधिक की संस्थापित सौर ऊर्जा क्षमता है, जिसमें 29 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाली तीन ग्राउंड-माउंटेड परियोजनाएं शामिल हैं। गिरिडीह जिले में एक बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएस) के साथ एक 100 मेगावाट की मेगा सौर ऊर्जा परियोजना निर्माणाधीन है।

कंपनी ने विस्फोट-रहित प्रौद्योगिकियों जैसे कि सतही खनन यंत्र और निरंतर खनन यंत्रों को अपनाया है। साथ ही साथ, ऊपरी परत के ढेरों का वैज्ञानिक पुनर्स्थापन, वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण और खदान सुधार जैसे उपाय भी किए हैं।

सीसीएल का शुद्ध लाभ 2017-18 में 808 करोड़ रुपये था जो 2024-25 में 4,035 करोड़ रुपये हो गया, जबकि इसी अवधि में नेट वर्थ 3,816 करोड़ रुपये से बढ़कर 16,464 करोड़ रुपये हो गयी। वित्त वर्ष 2025-26 में, सीसीएल ने लगभग 74 करोड़ रुपये के सीएसआर लक्ष्य के मुकाबले लगभग 86 करोड़ रुपये का कुल सीएसआर व्यय दर्ज किया।

सीसीएल के लाल और सीसीएल की लाडली कार्यक्रम के तहत वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली छात्रों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की कोचिंग प्रदान करता है, जिसमें प्रति वर्ष 40 छात्रों (20 लड़के और 20 लड़कियां) का चयन किया जाता है। इस कार्यक्रम ने ग्रामीण और खनन प्रभावित समुदायों के छात्रों को आईआईटी, एनआईटी और अन्य प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाया है।

इसी प्रकार, रांची के खेलगांव में सीसीएल और झारखंड सरकार की साझेदारी से स्थापित खेल अकादमी एक और महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरी है।

 

Next Post

ऑयल की चोरी करते रंगे हाथ पकड़ाया बदमाश

Tue Sep 22 , 2026
सिंगरौली । कोतवाली बैढ़न के समीपी बिलौंजी तिराहा के समीप स्थित आकाश ट्रैक्टर पार्ट्स में आज एक शातिर बदमाश पॉचवीं बार चोरी कर रहा था कि दुकानदार ने रंगे हाथ दबोच लिया। जहां गुस्साए लोगों ने शातिर चोर मुन्ना का अच्छे से खातिरदारी भी की है। वहीं बाद में पुलिस […]

You May Like