
अमरकंटक, मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी , विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल अमरकंटक का महत्वपूर्ण कपिलधारा मार्ग आज बदहाली की कहानी बयां कर रहा है । जिस सड़क का निर्माण कार्य पांच से छह माह में पूरा करने का दावा किया गया था , वह लगभग एक वर्ष बीत रहा है उसके वाऊजूद भी अधूरा पड़ा है । हालत यह है कि सड़क अब जगह-जगह बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और इस मार्ग से गुजरने वाला लगभग हर व्यक्ति प्रशासन और ठेकेदारों की व्यवस्था को कोसते हुए आगे बढ़ता है ।
कपिलधारा मार्ग केवल एक सड़क नहीं बल्कि अमरकंटक की जीवनरेखा माना जाता है । इसी मार्ग पर नगर का बड़ा अस्पताल स्थित है , जहां मरीजों और एम्बुलेंस का नियमित आवागमन रहता है । विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल कपिलधारा , दुग्धधारा सहित अनेक धार्मिक एवं प्राकृतिक दर्शनीय स्थलों तक पहुंचने के लिए भी पर्यटकों को इसी सड़क का सहारा लेना पड़ता है । इसके अलावा यह मार्ग नगर से बाहर जाने वाले प्रमुख संपर्क मार्गों में शामिल है ।
बारिश के मौसम ने समस्या को और विकराल बना दिया है । सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को यह तक समझ नहीं आता कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां । दोपहिया वाहन चालक , ऑटो रिक्शा , चार पहिया वाहन , बसें और यहां तक कि मरीजों को लेकर जाने वाली एम्बुलेंस भी जोखिम भरा सफर करने को मजबूर हैं । कई स्थानों पर दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है ।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क निर्माण शुरू होने पर लोगों को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद जगी थी लेकिन कार्य की धीमी गति और लापरवाही ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया । लोगों का आरोप है कि लंबे समय से समस्या बनी हुई है फिर भी संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं । यह कार्य लोक निर्माण विभाग के अधीनस्थ है ।
पर्यटन सीजन में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक अमरकंटक पहुंचते हैं । ऐसे में नगर की पहचान से जुड़े इस प्रमुख मार्ग की बदहाल स्थिति न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रही है बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों के सामने भी अमरकंटक की नकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत कर रही है ।
क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण कराया जाए तथा गड्ढों की तत्काल मरम्मत कर सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित किया जाए । लोगों का कहना है कि जब यह मार्ग अस्पताल , पर्यटन और आम जनजीवन से सीधे जुड़ा हुआ है , तो इसकी उपेक्षा आखिर कब तक जारी रहेगी?
