पर्यावरण पर भाषण झाड़ने वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को भी अदालत में ले जा सकते हैं: मोदी

नयी दिल्ली, 19 सितंबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के नाम पर विकास परियोजनाओं में अड़ंगा डालने वालों को शनिवार को आड़े हाथों लेते हुए ठोस आशंका जतायी है कि ‘पर्यावरण पर भाषण झाड़ने वाले” ऐसे लोग परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने के उनके कदम को रोकने के लिए अदालत में भी जा सकते हैं।

उन्होंने बिजली उत्पादन के कार्बन रहित स्रोतों को प्रोत्साहित करने की अपनी सरकार की नीति का उल्लेख करते हुए कहा, ‘ और अब देश न्यूक्लियर एनर्जी जनरेशन पर तेजी से काम कर रहा है। और जो लोग एनवायरमेंट (पर्यावरण) पर लंबे-लंबे भाषण झाड़ते रहते हैं। यह जब न्यूक्लियर एनर्जी (परमाणु बिजली) का काम मैं आगे बढ़ाऊंगा, तब रोकने के लिए अदालतों में जाकर खड़े हो जाएंगे, ।” श्री मोदी यहां राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) द्वारा पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की गति पर दो दिन के एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की इकाइयों को भी लाने का रास्ता बनाया गया है।

उन्होंने इस अवसर पर न्यायिक क्षेत्र के लोगों खास कर वकीलों को अपनी सरकार के पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के परिणाम, हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक परिवहन ,वृक्षारोपण जैसी तमाम पहलों से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में सफलताओं को गिनाते हुए उस पर गौर करने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘ आप आंकड़ों को देखिए, 12 साल पहले भारत की सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता करीब 2 गीगावाट (2000 मेगावाट) थी। अगर यहां वकील बैठे हैं, तो जरा ध्यान रखें आंकड़े कभी काम आएंगे। आज यह 160 गीगावाट (1.6 लाख मेगावाट) से ज्यादा हो चुकी है। 2 गीगावाट से 160 गीगावाट 12 साल में। हमने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों को ही सोलर पावर जनरेशन का केंद्र बनाने का मिशन शुरू किया। इस योजना के तहत अब तक 50 लाख से ज्यादा घरों में रूफ टॉप सोलर पैनल्स लग चुके हैं। यह दुनिया के कई देशों के टोटल घरों से ज्यादा है। इसके लिए सरकार ने हर घर को करीब 80,000 रूपये तक की आर्थिक मदद दी है।”

उन्होंने कुसुम योजना के तहत सरकार के 30 लाख किसानों के खेतों में सोलर पंप्स लगाये जाने , वन नेशन वन ग्रिड की महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा किये जाने , घरों में एलईडी बल्ब से बिजली की बचत और इन प्रयासों के परिणामों को देखने को कहा।

प्रधानमंत्री ने कहा, ” अकेले सौर ऊर्जा से ही भारत में करीब, यह आंकड़ा भी वकीलों के लिए है, भारत में करीब 20 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन रोकने में सफलता मिली है।” उन्होंने कहा कि बीते 12 साल में देश की पवनबजली क्षमता तीन गुना बढ़ी है। पनबिजली क्षमता में काफी बढ़ोतरी हुई है। इन कोशिशों की वजह से आज भारत की खनिज ईंधन से इतर स्रोतों से बिजली उत्पादन की क्षमता करीब-करीब चार गुना बढ़ गई है। भारत कोयले के और अधिक स्वच्छ उपयोग के लिए कोल गैसिफिकेशन जैसी टेक्नोलॉजी को भी बढ़ावा दे रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत आज स्वच्छ परिवहन और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहा है। अभी कुछ दिन पहले भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चली है और यह दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है। यह क्लीन मोबिलिटी के एक नए युग की शुरुआत है।

उन्होंने रेलवे के विद्युतीकरण और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भी कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का उल्लेख किया।

 

Next Post

इंदौर में चल रहे छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी और विद्यार्थियों के कुछ दृश्य

Sat Sep 19 , 2026
Facebook Share on X LinkedIn WhatsApp Email Copy Link

You May Like