
देवास। नदी की रेत केवल निर्माण सामग्री नहीं, बल्कि जल संचय और नदी के प्राकृतिक तंत्र का अहम हिस्सा है। रेत की परतें जलीय जीव-जंतुओं के आवास और उनके जीवनचक्र में भी भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद जिले में नर्मदा के घाटों पर रेत का उत्खनन जारी है। दूसरी ओर पहाड़ियों में मुरम खनन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अनुबंधित क्षेत्र से अधिक खुदाई की शिकायतों के बीच पहाड़ियों का स्वरूप बदल रहा है और पेड़-पौधों सहित प्राकृतिक पर्यावरण प्रभावित हो रहा है।
नर्मदा से जुड़े इमलीघाट, बिजलगांव, करोंद, चिचली सहित कई घाटों पर रेत उत्खनन की स्थिति सामने आ रही है। प्रशासन ने नर्मदा से रेत उत्खनन पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया है, इसके बावजूद नावों के जरिए नदी के बीच से रेत निकाली जा रही है। बांस में जाली लगाकर रेत एकत्रित करने के बाद उसे नाव में भरा जा रहा है और किनारे पर खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए परिवहन किया जा रहा है। मोटरपंप का इस्तेमाल करते हुए भी रेत निकाली जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार घाटों और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही रिकॉर्ड होती है। इसके बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि रेत परिवहन में लगी कई ट्रॉलियों पर नंबर प्लेट भी नहीं होती है, जिससे वाहनों की पहचान करना मुश्किल होता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इस संबंध में शिकायतें भी की हैं।
आसपास की पहाड़ियों पर भी सवाल-
नर्मदा के बाद पहाड़ियों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। शंकरगढ़ पहाड़ी पर पूर्व में बड़े पैमाने पर मुरम खनन हुआ। प्रशासन द्वारा अब यहां उत्खनन पर सख्ती की है, लेकिन पूर्व में हुए खनन के निशान पहाड़ी पर अब भी नजर आ रहे हैं। हालांकि यहां पर पर्यावरणप्रेमियों द्वारा बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है, जिससे पहाड़ी का स्वरूप निखर रहा है। वहीं शहर के आसपास की कई पहाड़ियों में अनुबंधित क्षेत्र से अधिक मुरम निकाले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता ललित चव्हाण का कहना है कि नदी से रेत का उत्खनन प्राकृतिक चक्र को प्रभावित करता है। कई जलीय जीव रेत पर प्रजनन करते हैं और यह उनका प्राकृतिक आवास भी है। इसी तरह पहाड़ियों में निर्धारित क्षेत्र से अधिक खुदाई होने पर पेड़-पौधों और प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचता है। पहाड़ियों का कटाव जलवायु परिवर्तन और स्थानीय पर्यावरण पर भी असर डाल सकता है।
विधायक बोले- खुफिया ऑपरेशन चलाकर हो कार्रवाई
कन्नौद-खातेगांव विधायक आशीष शर्मा का कहना है कि नर्मदा नदी से रेत उत्खनन को लेकर विधानसभा में प्रश्न भी लगाया। कलेक्टर और खनिज अधिकारी को भी समय-समय पर कार्रवाई के लिए अवगत करा रहे हैं। हमारा कहना है कि अवैध उत्खनन को लेकर खुफिया ऑपरेशन चलाया जाए और इसमें लिप्त लोगों की संपत्ति को प्रशासन राजसात करें।
खनिज विभाग बोला- लगातार कर रहे कार्रवाई
जिला खनिज अधिकारी रश्मि पांडे का कहना है कि अवैध उत्खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। नर्मदा नदी से रेत उत्खनन के मामलों में भी कार्रवाई की गई है और पिछले दिनों नावें जब्त की गई थीं। कार्रवाई के दौरान कई बार उत्खनन करने वाले हरदा जिले की सीमा में चले जाते हैं। एक अन्य समस्या यह है कि करीब-करीब हर दो किलोमीटर पर मुखबिर खड़े रहते हैं, जो कार्रवाई के लिए पहुंचने वाली टीम की सूचना पहले ही दे देते हैं।
