नई दिल्ली, दुनिया का पहला लिखित संविधान 17 सितंबर 1787 को अमेरिका में अपनाया गया था, जिसके आज 239 साल पूरे हो चुके हैं। जब ब्रिटेन, स्पेन और फ्रांस जैसे देश बिना किसी लिखित संविधान के वैश्विक स्तर पर शासन कर रहे थे, तब अमेरिका के लिए लिखित संविधान बनाना कोई क्रांतिकारी विचार नहीं बल्कि एक मजबूरी था। वर्ष 1776 में स्वतंत्रता मिलने के बाद अलग-अलग राज्यों में बंटे अमेरिका को एक मजबूत संघ के रूप में पिरोने और बिखराव से बचाने के लिए एक साझा कानूनी दस्तावेज तैयार करना बेहद आवश्यक हो गया था।
शुरुआती व्यवस्थाओं की कमियों और ‘ग्रेट कॉम्प्रोमाइज’ का इतिहास, दास प्रथा से लेकर राज्यों के प्रतिनिधित्व तक सुलझाए गए विवाद
शुरुआत में अमेरिका ‘आर्टिकल्स ऑफ कन्फेडरेशन’ के तहत चल रहा था जिसमें केंद्र सरकार के अधिकार काफी सीमित थे और राज्यों के बीच कर वसूली, आर्थिक नीतियों तथा दास प्रथा जैसे गंभीर मुद्दों पर भारी मतभेद थे। इन अंतर्विरोधों को दूर करने के लिए 1787 के संवैधानिक सम्मेलन में ‘ग्रेट कॉम्प्रोमाइज’ के तहत दो-सदनीय कांग्रेस की व्यवस्था की गई, जिसमें जनसंख्या और समानता के आधार पर राज्यों का प्रतिनिधित्व तय किया गया तथा केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया।
अमेरिकी संविधान में समय के साथ किए गए कई महत्वपूर्ण संशोधन, शुरुआती विवादों और गृह युद्ध के बावजूद आज भी जारी है यात्रा
यद्यपि अमेरिकी संविधान में शुरुआती दौर में दास प्रथा जैसी कुप्रथाएं मौजूद थीं और 1861 के गृह युद्ध जैसी परिस्थितियों को यह टाल नहीं सका, लेकिन बाद में ‘बिल ऑफ राइट्स’ और अन्य संशोधनों के जरिए नागरिकों को अभिव्यक्ति, धर्म व प्रेस की स्वतंत्रता जैसे बुनियादी अधिकार दिए गए। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण आज भी दुनिया भर की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में अमेरिकी संविधान के निर्माण और इसकी विकास यात्रा का विशेष अध्ययन किया जाता है।

