वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत भारत, चीन और पाकिस्तान समेत कुल 23 देशों को बड़े ड्रग्स ट्रांजिट और गैर-कानूनी नशीले पदार्थों के उत्पादन वाले देशों की सूची में शामिल किया है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस सूची में शामिल होने का मतलब किसी देश की सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठाना नहीं है, बल्कि यह भूगोल, व्यापार और अर्थव्यवस्था की वास्तविक सच्चाइयों को दर्शाता है। साथ ही, ट्रंप ने अफीम की खेती को रोकने और सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
फेंटानिल और सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते प्रवाह पर चिंता, चीन से केमिकल तस्करी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग
राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को दुनिया में फेंटानिल, मेथामफेटामाइन और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों का सबसे बड़ा उत्पादक करार दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह गंभीर मुद्दा सीधे तौर पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के समक्ष भी उठाया है। इसके अलावा, अमेरिका-भारत ड्रग्स पॉलिसी फ्रेमवर्क के माध्यम से आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने की उम्मीद जताई गई है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग्स तस्करी पर लगाम लगाई जा सके।
अमेरिका के दक्षिणी बॉर्डर पर कड़ी सुरक्षा का दावा, ड्रग्स ओवरडोज से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आने की बात
अपने आधिकारिक निर्देश में ट्रंप ने नशीली दवाओं की तस्करी और नार्को-टेररिस्ट संगठनों से निपटने में अपने प्रशासन की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने दावा किया कि कड़ी बॉर्डर सुरक्षा और सख्त नीतियों के कारण अमेरिका में तस्करी कर लाई जाने वाली फेंटानिल और अन्य ड्रग्स की जब्ती में भारी कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप ड्रग्स के ओवरडोज से होने वाली मौतों का ग्राफ भी काफी नीचे आया है, जिससे हजारों अमेरिकी नागरिकों की जान बचाई जा सकी है।

