वाशिंगटन, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को रूस के खिलाफ एक व्यापक प्रतिबंध पैकेज को 262 के मुकाबले 159 मतों से आधिकारिक रूप से पारित कर दिया है। यूक्रेन युद्ध और रूसी ऊर्जा क्षेत्र को लक्षित करने वाला यह महत्वपूर्ण कानून अब अंतिम हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेज दिया गया है। इस कानून के तहत रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और ‘शैडो फ्लीट’ के रूप में काम करने वाले जहाजों पर शिकंजा कसा जाएगा।
भारत और चीन जैसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का मार्ग प्रशस्त, रूसी ऊर्जा आयात को रोकने के लिए उठाया गया कदम
इस नए कानून के सबसे अहम और संवेदनशील हिस्से के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह कार्यकारी अधिकार मिल गया है कि वे रूस से पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस के प्रमुख आयातकों पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगा सकें। चूंकि भारत और चीन वर्तमान में रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से हैं, इसलिए इस क्लॉज का मुख्य उद्देश्य मॉस्को के सैन्य अभियानों को मिल रहे वित्तीय समर्थन को रोकना है, हालांकि यह बिल स्वतः ही भारत पर कोई टैरिफ नहीं लगाता बल्कि प्रशासन को यह अधिकार देता है।
सीनेट की मंजूरी के बाद अब ट्रंप की मुहर का इंतजार, मॉस्को के खिलाफ अमेरिकी दबाव और कूटनीतिक रणनीतियों में आई तेजी
इससे पहले सीनेट ने 7 अगस्त को 86-11 के बहुमत से इस बिल को मंजूरी दी थी, लेकिन टैरिफ प्रावधानों को लेकर हाउस में लंबी चर्चा चली। अब संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद, यदि राष्ट्रपति ट्रंप इस पर हस्ताक्षर कर देते हैं, तो अमेरिकी प्रशासन के पास रूस से ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों के खिलाफ कड़े प्रतिबंध और आर्थिक दबाव बनाने के नए कानूनी हथियार उपलब्ध हो जाएंगे।

