पैथोलॉजी केन्द्रों में प्रयोग होने वाले केमिकल की गुणवक्ता का निर्धारण हो

जबलपुर: पैथोलॉजी केंद्रों में अमानक केमिकल प्रयुक्त किये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैथ तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ से अनावेदको ने स्टेटस रिपोर्ट पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया। युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गयी है।

जबलपुर निवासी अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता की तरफ से साल 2015 में उक्त याचिका दायर की गयी थी। जिसमें कहा गया था कि पैथोलॉजी केंद्र में विभिन्न परीक्षणों के लिए केमिकल का उपयोग किया जाता है। परीक्षणों की शुद्धता के लिए यह अनिवार्य है कि कैमिकल उच्च यानि मानक गुणवत्ता के हों। इनके अभाव में परीक्षण रिपोर्ट की विश्वसनीयता कठघरे में चली जाती है। केमिकल की मानक गुणवत्ता निर्धारित करने साल 2009 में आयोग गठित किया गया था।

एक दशक से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद भी मानक का निर्धारण नहीं किया गया है। नतीजतन पैथोलॉजी केन्द्रों में अमानक केमिकल से जांच होने पर अपेक्षाकृत विरोधाभासी रिपोर्ट सामने आती हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। पैथालाजी केंद्रों को एनएबीएल से सम्बद्धता लेनी होती है। मप्र में वर्ष 2017 की स्थिति में मात्र 17 पैथालाजी एनएबीएल से सम्बद्ध थीं। कालांतर में यह संख्या 17 से बढक़र सिर्फ 49 हुई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी कितनी बड़ी संख्या में असम्बद्ध पैथोलॉजी केंद्र संचालित हो रहे है।

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