नई दिल्ली, देश भर के आम उपभोक्ताओं के लिए रसोई के बजट को राहत देने वाली एक अहम खबर सामने आई है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने घोषणा की है कि पिछले नौ दिनों के दौरान देश की प्रमुख थोक मंडियों में प्याज की कीमतों में 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि इससे पहले औसत खुदरा कीमत 53.92 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी, लेकिन थोक बाजारों में आई इस सुस्ती का सीधा असर अब खुदरा बाजारों पर भी देखने को मिलेगा, जिससे आम जनता को जल्द राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।
देश में प्याज का कुल उत्पादन 307.37 लाख टन, मानसूनी सीजन की वजह से अस्थायी रूप से बढ़े थे दाम
पीएचडीसीसीआई के एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया गया कि देश में प्याज की उपलब्धता की कोई कमी नहीं है और इस वर्ष कुल उत्पादन 307.37 लाख टन रहा है, जो पिछले साल के लगभग बराबर है। आमतौर पर अगस्त और सितंबर के महीनों में मानसूनी बारिश से जुड़ी परिवहन समस्याओं और त्योहारी मांग के कारण कीमतों में थोड़ी तेजी आ जाती है, लेकिन उत्पादन मजबूत होने के कारण स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
सरकार के सख्त बाजार हस्तक्षेप और ‘कांदा एक्सप्रेस’ का असर, 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर हो रही बिक्री
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने गत 24 अगस्त से ही बाजार में आक्रामक हस्तक्षेप करते हुए 48 प्रमुख शहरों में 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर प्याज उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। सरकार अपने 1.21 लाख टन के बफर स्टॉक से आपूर्ति के लिए सड़क मार्ग के अलावा विशेष मालगाड़ियों यानी ‘कांदा एक्सप्रेस’ का उपयोग कर रही है, जिससे त्योहारी सीजन से पहले दाम पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है।

