
जबलपुर। सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ तहसील में जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में दमोह निवासी सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जहरीली शराब पीने से कई निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी तो वहीं कई लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। इस भीषण त्रासदी ने प्रदेशभर को हिलाकर रख दिया था। इस घटना की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए सुनवाई के लिए 22 सितम्बर की तारीख तय की है।
दमोह निवासी सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सिंह की ओर से दायर याचिका में मध्य प्रदेश शासन, गृह विभाग के प्रमुख सचिव, आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक, आबकारी आयुक्त, कलेक्टर सागर, पुलिस अधीक्षक सागर, जिला आबकारी अधिकारी सागर तथा थाना प्रभारी बंडा को अनावेदक बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि घटना से पहले संदिग्ध शराब के स्टाक को कथित रूप से क्लीन चिट दिए जाने और पूर्व में प्राप्त शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने की भी जांच होनी चाहिए।
कलेक्टर-एसपी के तबादले की मांग
याचिका में अंतरिम राहत के तौर पर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सागर को तत्काल जिले से स्थानांतरित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि निष्पक्ष जांच के लिए जांच प्रक्रिया को किसी भी संभावित प्रशासनिक प्रभाव से मुक्त रखना आवश्यक है।
नकली शराब नेटवर्क का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि बंडा और शाहगढ़ इलाके में मिलावटी शराब का नेटवर्क सक्रिय था। सागर गोल्ड और बॉम्बे व्हिस्की के नाम से शराब बेची जा रही थी, इसे पीने से कई गांवों में लोग बीमार पड़े और मौतों की बात भी कही गई है। मांग की गई है कि घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जब तथ्य-अन्वेषण जांच समिति का गठन किया जाए। घटना से ठीक पहले संदिग्ध शराब के स्टॉक को कथित तौर पर दी गई क्लीन चिट और पूर्व में मिली शिकायतों को नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों की भूमिका की गहराई से जांच की जाए।
