
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (वार्ता) सेवानिवृत्ति की पारंपरिक उम्र (58-60 साल) के बजाय 70 प्रतिशत शहरी भारतीय इससे पहले रिटायर होना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए योजना बनाने में देरी के कारण उनमें से ज्यादातर लोगों की आर्थिक स्थिति इसकी अनुमति नहीं देती है। एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड ने डाटा विश्लेषण कंपनी कांतार के साथ मिल किए गए एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात कही है। एक्सिस मैक्स लाइफ के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमित मदान ने यहां बुधवार को मीडिया के समक्ष सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि सालाना ‘भरोसा टॉक्स
इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी’ में कई दिलचस्प बातें सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि अगर आर्थिक जरूरतें पूरी हो जाएं तो 10 में से सात शहरी भारतीय 58-60 साल की उम्र से पहले ही सेवानिवृत्त होना चाहेंगे। सेवामुक्त होने की चाहत रखने वालों में से आधे लोग 50 साल की उम्र से पहले ही वित्तीय रूप से सक्षम होकर रिटायर होना चाहते हैं। हालांकि, सर्वे में शामिल लोगों ने अपने रिटायरमेंट के लिए तय किए गए अपने फंड का औसतन सिर्फ 28 प्रतिशत ही अब तक जमा किया है। यह जल्दी सेवानिवृत्ति की इच्छा और उसके लिए वास्तविक तैयारी के बीच के अंतर को दिखाता है।
कांतार की दक्षिण एशिया की प्रबंध निदेशक और मुख्य क्लाइंट अधिकारी सौम्या मोहंती ने कहा कि अब युवाओं की सोच बदल रही है। शहरों में रहने वाले हर दो में से एक भारतीय का कहना है कि वे अपने पहले वेतन से ही सेवानिवृत्ति की तैयारी शुरू कर देते हैं। जेन ज़ी इसके लिए 29 साल की उम्र सही मानते हैं, जबकि मिलेनियल्स के लिए यह 31 साल और जेन एक्स प्लस के लिए 34 साल सही उम्र है। जेन ज़ी के 62 प्रतिशत लोगों ने सेवानिवृत्ति के लिए निवेश करना शुरू कर दिया है, जबकि मिलेनियल्स में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत और जेन एक्स प्लस में 75 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल सेवानिवृत्ति को लेकर देश की तैयारी मजबूत नजर आई है। सर्वेक्षण में ‘भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0’ स्कोर 49 रहा। यह 2025 में 48 और 2022 में 44 था। वित्तीय तैयारी का स्कोर थोड़ा बढ़कर 51 से 52 हो गया, स्वास्थ्य संबंधी तैयारी का स्कोर 46 पर स्थिर रहा, जबकि भावनात्मक तैयारी का स्कोर पिछले साल के 58 के मुकाबले 57 रहा।
श्री मदान ने कहा कि 61 प्रतिशत लोग जानते हैं कि सेवामुक्त होने के बाद के वर्षों में अपनी मौजूदा जीवनशैली बनाए रखने के लिए उन्हें कितनी रकम की जरूरत होगी, लेकिन उन्हें इस बात का पूरा भरोसा नहीं है कि यह रकम काफी होगी। सिर्फ 11 प्रतिशत लोगों को लगता है कि उनकी बचत जिंदगी भर चलेगी। वहीं, 39 प्रतिशत लोगों को लगता है कि उनकी बचत पांच साल भी नहीं चल पाएगी।
जब लोगों से यह पूछा गया कि सेवानिवृत्ति का बाद आराम से जिंदगी जीने के लिए क्या एक करोड़ रुपये की राशि काफी है, तो 70 प्रतिशत ने हां में जवाब दिया। वहीं पिछले साल ऐसा मानने वाले 77 प्रतिशत थे। यह सोच उन लोगों में खास तौर पर कम है जिनकी सालाना घरेलू आय 15 लाख रुपये से अधिक है। इस आय स्तर पर ऐसा मानने वाले 51 प्रतिशत हैं, जबकि मेट्रो शहरों में रहने वालों में ऐसा मानने वाले 63 प्रतिशत हैं।
सेहत के बारे में पूछे जाने पर 75 प्रतिशत लोगों कहा कि वे सेवानिवृत्ति के बाद भी सेहतमंद और फिट रहने की उम्मीद करते हैं। वर्तमान समय में 52 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्होंने स्वास्थ्य बीमा लिया है और जो लोग नियमित तौर पर शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, उनमें से 44 प्रतिशत लोग रोजाना ऐसा करते हैं। इसके अलावा, 21 प्रतिशत लोग अपनी सेहत पर नजर रखने के लिए वियरेबल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं।
देश में 87 प्रतिशत शहरी लोग सेवानिवृत्त होने के बाद अपने बच्चों के साथ रहने की उम्मीद करते हैं। हालांकि रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में परिवार और समाज का साथ मिलने का भरोसा 87 प्रतिशत से घटकर 84 प्रतिशत हो गया है।सर्वेक्षण में मेट्रो और टीयर-1 शहरों की तुलना में टीयर-2 शहरों में सेवानिवृत्ति के प्रति लोगों की जागरुकता ज्यादा बढ़ी है। इसमें मुख्य योगदान अच्छी सेहत के लिए तैयारियों में सुधार का रहा जिसमें टीयर-2 शहरों का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा।
क्षेत्रवार ‘भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0’ में 52 के स्कोर के साथ पूर्वी क्षेत्र सबसे आगे है। इसके बाद पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र 49-49 के स्कोर के साथ तथा उत्तरी क्षेत्र 47 के स्कोर के साथ हैं। दक्षिणी क्षेत्र में अच्छी सेहत को लेकर तैयारियों में सुधार हुआ है और इसका स्कोर 43 से बढ़कर 47 हो गया है।
