आईआईटी इंदौर का हाइड्रोवर्स टॉप-11 में, बाढ़-सूखे और लू का पहले बताएगा खतरा

इंदौर:बाढ़, सूखे और लू जैसे जलवायु खतरों की पहले से पहचान कर स्थानीय स्तर पर अलर्ट देने की दिशा में आईआईटी इंदौर ने अहम कदम उठाया है. संस्थान की वॉटर, क्लाइमेट एंड सस्टेनेबिलिटी लैब द्वारा विकसित हाइड्रोवर्स एआई को नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज-2026 के शीर्ष 11 फाइनलिस्ट में चुना गया है. नाबार्ड की अगुवाई में आयोजित इस राष्ट्रीय चुनौती में देशभर से 150 से अधिक प्रस्ताव आए थे.

प्रो. मनीष कुमार गोयल के मार्गदर्शन में तैयार हाइड्रोवर्स एआई कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग की मदद से उपग्रह आंकड़ों, जलवायु पुनर्विश्लेषण डेटासेट और सीएमआईपी6 जलवायु प्रक्षेपणों का विश्लेषण करता है. इसके आधार पर किसी जिले में बाढ़, सूखा, लू और कृषि पर जलवायु परिवर्तन के संभावित असर का आकलन किया जा सकता है.

खास बात यह है कि प्रोटोटाइप का मध्य प्रदेश के सभी जिलों में ऐतिहासिक जलवायु आंकड़ों और वर्ष 2040 तक के जलवायु प्रक्षेपणों के आधार पर परीक्षण किया गया है. यह जोखिम मानचित्र और सूचकांक तैयार करने के साथ संभावित खतरे के अनुसार कार्रवाई योग्य सलाह भी देता है. इससे किसानों को खेती की योजना बनाने, प्रशासन को आपदा प्रबंधन और नीति-निर्माताओं को स्थानीय स्तर पर योजना तैयार करने में मदद मिल सकती है.
आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने इसे संस्थान के लिए गौरव का क्षण बताते हुए टीम को बधाई दी.

विस्तार देने की संभावनाओं पर काम कर रहे
प्रो. गोयल के अनुसार, उद्देश्य जटिल जलवायु आंकड़ों को स्थानीय स्तर पर आसानी से उपयोग की जा सकने वाली जानकारी में बदलना है. परियोजना टीम में प्रो. गोयल के साथ विशाल गौतम, डॉ. सृजा रॉय, डॉ. कुलदीप सिंह रौतेला और डॉ. विनोद कुमार साहू शामिल हैं. टीम अब इस तकनीक को मध्य प्रदेश से आगे अन्य राज्यों तक विस्तार देने की संभावनाओं पर काम कर रही है.

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