
इंदौर. आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच में अब तेजी आने की उम्मीद है. प्रवर्तन निदेशालय ने जांच पूरी करने में लगने वाला समय मौजूदा 4 से 5 साल से घटाकर करीब डेढ़ साल करने का लक्ष्य तय किया है. इसका असर मध्यप्रदेश में चल रही ईडी की जांचों पर भी पड़ सकता है.
ईडी के 36वें त्रैमासिक क्षेत्रीय अधिकारियों के बेंगलुरु में आयोजित सम्मेलन में जांच व्यवस्था में बड़े बदलावों का रोडमैप तैयार किया. स्वीकृत पदों की संख्या 2029 से बढ़ाकर 3256 की जाएगी. नई व्यवस्था को 1 जनवरी 2027 से लागू करने का लक्ष्य है. इसके साथ ही कार्यात्मक इकाइयों की संख्या 131 से बढ़कर 241 होगी. देशभर में 50 पीएमएलए जोन और पांच फेमा जोन बनाए जाएंगे. मध्यप्रदेश में ईडी का जोनल कार्यालय भोपाल में और उप-क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर में है. ऐसे में नई व्यवस्था का असर प्रदेश में आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की जांच, संपत्ति की कार्रवाई और अभियोजन की गति पर पड़ सकता है. हालाकिं ईडी की अधिकृत जानकारी में इंदौर या भोपाल कार्यालय के लिए अलग से स्टाफ या पदों का ब्योरा नहीं दिया है.
हर जोन में 10 बड़े मामलों पर जोर…
ईडी ने प्रत्येक क्षेत्र में कम से कम 10 हाई-प्रोफाइल मामलों की पहचान कर उनके ट्रायल और दोषसिद्धि की प्रक्रिया 6 से 8 महीने में पूरी कराने पर जोर दिया है. साथ ही अटैच और जब्त संपत्तियों को वास्तविक पीड़ितों तक लौटाने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं. पुष्ट रूप से अटैच संपत्तियों का सरकारी मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ताओं से मूल्यांकन, जियो-टैगिंग और कब्जे की प्रक्रिया भी समयबद्ध करने को कहा है.
साइबर और डिजिटल लेनदेन पर भी नजर…
सम्मेलन में साइबर अपराध, डिजिटल लेनदेन और वर्चुअल डिजिटल एसेट से जुड़े मामलों की जांच के लिए तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. उन्नत साइबर फोरेंसिक उपकरण और फील्ड एक्विजिशन किट उपलब्ध कराने तथा दूसरे जांच संस्थानों के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करने पर जोर दिया. ईडी की अधिकृत जानकारी के अनुसार अब तक 76 मामलों में 73,800 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति पीड़ितों को लौटाई जा चुकी है. आगे भी संपत्ति की वापसी को जांच प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाने की तैयारी है.
76 मामलों में 73,800 करोड़ से ज्यादा लौटाए…
ईडी ने अब तक 76 मामलों में 73,800 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति पीड़ितों को लौटाई जा चुकी है. अब अटैच और जब्त संपत्तियों को वास्तविक हकदारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को जांच का अहम हिस्सा बनाया जाएगा. इसके लिए संपत्तियों के मूल्यांकन, जियो-टैगिंग और कब्जे की प्रक्रिया भी समयबद्ध करने पर जोर दिया है.
