
विंध्य की डायरी
डा. रवि तिवारी
राजनीति का गिरता हुआ चरित्र आज एक गंभीर और चिंता का विषय बन गया है. जहां वैचारिक मूल्यों की जगह केवल सत्ता प्राप्ति और अवसरवादी सोच हावी हो रही है. राजनीतिक मर्यादा और चरित्र में गिरावट को लेकर काफी चिंताएं है. किसी भी परिस्थिति में किसी नेता के घर पर जबरन घुसना कहीं से भी सही नहीं है. राजनीति में शुचिता लाने और अपनी बात रखने के लिये लोकतंत्र में कई अन्य रास्ते उपलब्ध है. लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी असहमति जताने और प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है. जच्चा-बच्चा की मौत के विरोध में जिस तरह से प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला के निज निवास रीवा में यूथ कांग्रेस ने जबरन प्रवेश किया , उसमें उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा. साथ ही एक गंभीर सुरक्षा चूक है. पुलिस और खूफिया तंत्र पूरी तरह से असफल रहा है, आखिर इतनी बड़ी चूक हुई कैसे. जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर घटना को लेकर जिम्मेदारी तय होनी चाहिये. लोकतंत्र में किसी भी नीति, घटना या विफलता के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना, पुतला फूंकना, धरना देना या ज्ञापन सौंपना वैध राजनीतिक चरित्र माना जाता है. इसके विपरीत आवास में घुस कर मुर्दाबाद के नारे लगाना अभद्रता करना राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है और यह अराजकता की श्रेणी में आता है. एक सवाल यह खड़ा होता है कि घटना के दूसरे दिन सत्ताधारी दल भाजपा सांसद के नेतृत्व में अपनी ही सरकार में प्रदर्शन कर आईजी को ज्ञापन सौंपकर प्रकरण दर्ज करने की मांग की जाती है और चंद घंटों में एफआईआर भी दर्ज होती है, ऐसे में सवाल उठना लाजमी है. सार्वजनिक जीवन में उच्च मानवीय मूल्यों, ईमानदारी और जवाबदेही बनाए रखना है. राजनीतिक दलों में अब स्थाई वैचारिक प्रतिबद्धता नही दिखती, बल्कि दलगत स्वार्थ और जुमलेबाजी ने उनकी जगह ले ली है.
विधायक ने जनता को बताया ‘अनपढ़’
जिस जनता ने वोट देकर आम आदमी को माननीय विधायक बनाया, उसी जनता को अब विधायक गरीब और अनपढ़ बता रहे हैं . अनपढ़ वाले बयान के सामने आने के बाद स्थानीय जनता और कांग्रेस पार्टी ने इसे जनता का अपमान और घमंड बताया. जिसके कारण राजनीति गरमा गई है. दरअसल मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान शिविर के दौरान सिरमौर से भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह ने कहा कि सिरमौर की जनता अनपढ़ और गरीब है. उन्होने यह संदर्भ दिया कि लोग नहीं समझ पाते कि वे किस चीज का फार्म भर रहे हैं या उन्हे योजनाओं का सही समय पर लाभ क्यों नही मिल पा रहा है. अब बड़ा सवाल यह उठता है कि विधायक जी 12 वर्ष से विधायक है आपने अनपढ़ और गरीबी हटाने के लिये क्या किया. क्योंकि चुनाव तो गरीबी हटाओ और शिक्षा देने के नाम पर होते हैं तो फिर आपने उसके समाधान के लिये प्रयास क्यों नही किया? क्या इसमें भी कांग्रेस का दोष है, मतलब साफ है आपने जिम्मेदारी का निर्वहन ईमानदारी से नही किया. जनता चाहे अनपढ़ हो या गरीब लेकिन आपको अपना जनप्रतिनिधि चुना है. सार्वजनिक सभा से क्षेत्र की जनता का इस तरह का उपहास उड़ाना तुष्टिकरण की राजनीत का परिचायक है. अनपढ़ जनता ने ही लगातार तीन बार माननीय विधायक बनाया है.
उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा
गुढ़ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नागेन्द्र सिंह की बड़ी बहू श्रीमती रश्मि राजा सिंह के राजनीति में आने और भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद राजनीतिक गलियारे में उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी बनने की चर्चाएं तेज हो गई है. हाल ही में रीवा सांसद के हाथों सदस्यता ग्रहण की है. उनकी इस राजनीतिक एंट्री को आगामी विधानसभा चुनाव और नागेन्द्र सिंह के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है. हालाकि पार्टी या परिवार की ओर से अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नही हुई है, लेकिन सदस्यता के बाद कई तरह की चर्चाएं चल रही है. माना जा रहा है कि विधायक जी ने आने वाले चुनाव को लेकर तैयारी अभी से शुरू कर दी है. भविष्य के समीकरणों और महिला नेतृत्व की दावेदारी से जोड़ कर देखा जा रहा है. अब सवाल यह है कि नजदीकी रिश्तेदार जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रणव प्रताप सिंह का क्या होगा, टिकट में पेंच फसेगा. हालाकि पिछले एक माह से प्रणव प्रताप क्षेत्र में एक बार फिर तेजी से सक्रिय है . बीच में सक्रियता थम गई थी.
