
वाशिंगटन, 15 सितंबर (वार्ता) अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की देशभर में मतदाताओं को डाक मतपत्र भेजने की प्रक्रिया में बदलाव की विवादास्पद योजना को खारिज कर दिया।
यह फैसला इस साल होने वाले मध्यावधि चुनावों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि प्रस्ताव लागू होने पर इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
अदालत के अधिकांश न्यायाधीशों ने उस प्रक्रिया पर रोक लगा दी, जिससे अमेरिकी डाक सेवा को संभावित रूप से लाखों डाक मतपत्र रोकने का अभूतपूर्व अधिकार मिल जाता। रिपब्लिकन पार्टी के कुछ चुनाव अधिकारियों ने भी चेताया था कि इससे अव्यवस्था और बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित होने की स्थिति पैदा हो सकती है।
अदालत ने तीन वाक्यों के बिना हस्ताक्षर वाले आदेश में कहा कि प्रशासन के अपने मामले में सफल होने की संभावना कम है। रूढ़िवादी न्यायाधीश सैमुअल अलिटो और क्लेरेंस थॉमस ने असहमति जतायी।
यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप के लिए बड़ा झटका है, जो वर्षों से डाक मतदान के खिलाफ व्यापक धोखाधड़ी के झूठे आरोप लगाते रहे हैं, जबकि वह स्वयं डाक से मतदान करते रहे हैं।
प्रशासन ने अपनी योजना को कथित चुनावी धोखाधड़ी से बचाव के लिए डाक नियमों में एक ‘मामूली’ बदलाव बताया था। हालांकि, ट्रंप के आलोचकों ने इसे असंवैधानिक तरीके से अधिकार हासिल करने का प्रयास बताया और कहा कि अमेरिकी डाक सेवा भी इसे लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थी।
अदालत के रूढ़िवादी धड़े के न्यायाधीश ब्रेट कवानौ ने अलग सहमति लिखते हुए कहा कि उनके विचार से यह प्रस्ताव अमेरिकी डाक सेवा के अधिकार क्षेत्र में हो सकता है, लेकिन चुनावों से पहले इसे लागू करने के लिए राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के पास पर्याप्त समय नहीं है।
यह टिप्पणी उन राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों की बड़ी संख्या में दाखिल याचिकाओं के संदर्भ में थी, जिन्होंने कहा था कि चुनाव प्रक्रिया के इस चरण में राष्ट्रपति के आदेश को लागू करने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा है।
न्यायमूर्ति कवानौ की टिप्पणी से यह भी संकेत मिला कि भविष्य के चुनावों में श्री ट्रंप के साथ अलिटो और थॉमस इस तरह के बदलावों के पक्ष में आ सकते हैं।
श्री ट्रंप वर्षों से डाक मतदान को लेकर साजिश संबंधी दावों को बढ़ावा देते रहे हैं और 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम को बदनाम करने के लिए इनका इस्तेमाल करते रहे हैं। चुनाव में अनुचित मतदान बेहद दुर्लभ है और प्रशासन ने कभी भी व्यापक धोखाधड़ी का ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया है, जो 2020 के चुनाव या किसी अन्य चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सके।
