
आइजोल, 15 सितम्बर (वार्ता) युवा मामले और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने आइजोल के दौरे के दौरान मिजोरम में खेल इकोसिस्टम का जायजा लिया। इस दौरे का मकसद खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, खिलाड़ियों को सहायता देना और पूर्वोत्तर के खेल प्रतिभाओं के लिए बेहतर अवसर पैदा करना था। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन के अनुरूप था, जिसका लक्ष्य एक मजबूत खेल संस्कृति का निर्माण करना और युवा भारतीयों के लिए अवसरों का विस्तार करना है।
अपनी यात्रा के दौरान, श्रीमती रक्षा खडसे का स्वागत मिजोरम सरकार के खेल और युवा सेवा राज्य मंत्री पू लालनिंगलोवा हमार ने किया। उन्होंने मंत्री के साथ बातचीत की और राज्य में खेल इकोसिस्टम को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। बातचीत का मुख्य केंद्र केंद्र-राज्य समन्वय, खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, खेल प्रतिभाओं को निखारना और मिजोरम तथा पूरे पूर्वोत्तर के युवा खिलाड़ियों के लिए बेहतर अवसर पैदा करना था।
इसके बाद श्रीमती खडसे ने आइजोल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) केंद्र का दौरा किया, जहां उन्होंने उपलब्ध खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का जायजा लिया और खिलाड़ियों, कोचों तथा सपोर्ट स्टाफ से बातचीत की। दौरे के दौरान साई के असिस्टेंट डायरेक्टर शिवम यादव भी मौजूद थे।
खिलाड़ियों के साथ बातचीत के दौरान, श्रीमती खडसे ने उनकी ट्रेनिंग, प्रतिस्पर्धा के अनुभवों और आकांक्षाओं के बारे में जाना और खेल में उत्कृष्टता के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने पूर्वोत्तर के युवा खिलाड़ियों को अच्छी कोचिंग, वैज्ञानिक सहायता, रिहैबिलिटेशन, पोषण, प्रतिस्पर्धा का अनुभव और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करने के महत्व पर जोर दिया।
पूर्वोत्तर में साई की महत्वपूर्ण उपस्थिति है, जो इस क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं के विकास और खेल को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों को लागू करने में सहायता करता है। श्रीमती खडसे ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की संस्थागत सहायता, साथ ही ‘खेलो इंडिया’ योजना के तहत शुरू की गई पहल, युवा खिलाड़ियों के लिए जमीनी स्तर की भागीदारी से प्रतिस्पर्धी खेलों की ओर बढ़ने के लिए व्यापक रास्ते बनाने में मदद कर रही है। सरकार मिजोरम में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का काम भी जारी रखे हुए है। आइजोल के साई ट्रेनिंग सेंटर में सिंथेटिक हॉकी टर्फ लगाने और लाइटिंग की सुविधा देने के लिए ‘खेलो इंडिया’ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, राज्य में हॉकी सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
श्रीमती खडसे ने कहा कि मिजोरम ने पूर्वोत्तर में खेलों की जबरदस्त क्षमता दिखाई है, खासकर फुटबॉल और हॉकी में। राज्य के खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि लगातार संस्थागत सहयोग के जरिए प्रतिभा को निखारना और युवा खिलाड़ियों के रहने और ट्रेनिंग करने की जगह के पास ही अवसर पैदा करना कितना जरूरी है।
लालरेम्सियामी हमारज़ोटे इस क्षमता का एक बेहतरीन उदाहरण हैं। वह मिजोरम की पहली महिला ओलंपियन और एशियाई खेलों की पदक विजेता बनीं; उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने से पहले थेनज़ॉल में साई अकादमी में ट्रेनिंग ली थी। उन्हें अर्जुन पुरस्कार 2025 के लिए भी चुना गया है, और वह यह सम्मान पाने वाली मिजोरम की पहली खिलाड़ी बन गई हैं।
श्रीमती खडसे ने जोर दिया कि सरकार का नजरिया खिलाड़ियों के विकास का एक पूरा इकोसिस्टम बनाने का है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ अच्छी कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, रिहैबिलिटेशन, न्यूट्रिशन और नियमित रूप से प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर भी मिलें। उन्होंने खेल के अवसरों को बढ़ाने और जमीनी स्तर से प्रतिभा को निखारने में ‘खेलो इंडिया’ की भूमिका पर प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन में देश भर में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने, जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान करने और युवा खिलाड़ियों को उत्कृष्टता की ओर ले जाने के लिए व्यवस्थित रास्ते उपलब्ध कराने पर अधिक जोर दिया गया है। श्रीमती खडसे ने दोहराया कि पूर्वोत्तर, अपनी मजबूत खेल संस्कृति और भरपूर प्रतिभा के साथ, भारत की खेल यात्रा में एक अहम भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के करीब सुविधाएं मजबूत करना, युवा प्रतिभाओं के लिए अवसर बढ़ाना और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच प्रभावी तालमेल सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि मिजोरम और पूरे पूर्वोत्तर के अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकें। इस दौरे ने पूर्वोत्तर के युवाओं के लिए खेल के अवसरों को मजबूत करने पर श्रीमती रक्षा खडसे के फोकस और इस क्षेत्र में एक मजबूत, अधिक सुलभ और खिलाड़ी-केंद्रित खेल इकोसिस्टम बनाने के लिए युवा मामले और खेल मंत्रालय तथा साई के निरंतर प्रयासों की पुष्टि की।
