शहर में वृद्धावस्था पेंशन योजना की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक

इंदौर: शहर में वृद्धावस्था पेंशन योजना की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है, जहां बुजुर्ग मामूली राशि के लिए भी निगम दफ्तर और बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर हैं. कई बुजुर्गों की वृद्धावस्था पेंशन पिछले कई सालों से तकनीकी खराबी, सत्यापन (केवाईसी) न होने या अन्य प्रशासनिक कारणों से रुकी हुई है. मात्र 600 रुपये जैसी छोटी राशि पाने के लिए भी बुजुर्गों को बैंक और सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे वे शारीरिक और मानसिक रूप से थक चुके हैं.

केंद्र और राज्य सरकार की वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत बुजुर्गों को आर्थिक सहारा देने का दावा किया जाता है. पेंशन राशि पहले 300 रुपए थी, जिसे बढ़ाकर 600 रुपए कर सरकार ने खूब वाहवाही लूटी, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है. वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिलने की शिकायत पाटनीपुरा क्षेत्र से भी सामने आई है. यहां कई हितग्राहियों ने पेंशन नहीं मिलने की शिकायत की है. क्षेत्र में ऐसे बुजुर्ग दंपती मिले, जिनकी पेंशन पिछले कई वर्षों से बंद है. पेंशन चालू कराने के लिए कई बार नगर निगम और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ.

आखिरकार थक-हारकर और निराश होकर उन्होंने आस ही छोड़ दी. यहां कुछ बुजुर्ग ऐसे भी हैं, जो बिना सहारे चल नहीं पाते, और गुजारे के लिए 65 वर्ष की उम्र में भी मजदूरी करने को मजबूर हैं. सवाल यह है कि जब पेंशन योजना बुजुर्गों के लिए है तो पात्र हितग्राहियों तक राशि क्यों नहीं पहुंच रही? सरकार पेंशन के नाम पर बजट खर्च कर रही है, लेकिन जमीन पर बुजुर्ग इसके लिए भटक रहे हैं. आखिर व्यवस्था में कमी कहां है और छह साल से रुकी पेंशन की जवाबदेही कौन लेगा? इसकी जांच की जानी चाहिए.

यह बोले हितग्राही…

पिछले 6 वर्ष पहले मेरी पेंशन बंद कर दी. बैंक और कार्यालय के पचासों चक्कर लगाए, तब भी कोई सुनवाई नहीं हुई. आखिरकार ना उम्मीद होकर मैनें जाना ही छोड़ दिया.
– बाबूलाल जारवाल

मेरे पति ओम प्रकाश निहोरे की पेंशन बंद हुए 8 वर्ष हो चुके हैं, बैंक वाले कहते हैं, इनका खाता नंबर नहीं मिल रहा. पार्षद को भी बोला, निगम कार्यालय भी कई बार गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.
– लक्ष्मी बाई निहोरे

11 महीने पहले मैंने पेंशन चालू करवाने के लिए पार्षद से आग्रह किया, लेकिन नहीं हुई, जिनकी पेंशन बंद हो चुकी है, शायद ही उनको और मुझे पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा.
– किशोर जारवाल

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