
देवास। गणपति बप्पा के जयकारों से सोमवार को शहर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। उत्साह और उमंग के बीच घर-घर में भगवान श्रीगणेश की स्थापना हुई तो शहर के सार्वजनिक पंडाल भी आकर्षक और मनमोहक प्रतिमाओं से सज उठे। सुबह से देर रात तक बाजारों में गणेश प्रतिमाएं खरीदने के लिए लोगों की भीड़ रही।
ढोल-धमाकों के बीच गणपति की भव्य प्रतिमाएं स्थापना स्थलों तक पहुंचीं और शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ गणेशोत्सव का शुभारंभ हुआ। शाम होते-होते शहर के विभिन्न पंडालों और मंदिरों में आरती के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दस दिनों तक अब शहर गणपति भक्ति, भजनों और धार्मिक आयोजनों से सराबोर रहेगा।
बाजार में सुबह से रही रौनक, प्रतिमाओं ने मोहा मन-
गणेश चतुर्थी को लेकर सुबह से ही शहर के बाजारों में खासा उत्साह दिखाई दिया। जगह-जगह भगवान श्रीगणेश की आकर्षक और सुंदर प्रतिमाएं बिक्री के लिए सजी थीं। श्रद्धालुओं ने अपनी पसंद की प्रतिमाएं खरीदीं और उत्साह के साथ उन्हें घर लेकर पहुंचे। इसके बाद शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीगणेश की विधि-विधान से स्थापना की गई। बाजार में मोतीचूर के लड्डू, मोदक और अन्य प्रसाद की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ नजर आई।
ढोल-धमाकों के साथ पंडालों तक पहुंचे गणपति-
सार्वजनिक गणेशोत्सव समितियों में भी खासा उत्साह रहा। समितियों के सदस्य ढोल-धमाकों और गाजे-बाजे के साथ भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाएं लेकर स्थापना स्थलों तक पहुंचे। इस दौरान पूरे रास्ते ‘गणपति बप्पा मोरिया’ के जयकारे गूंजते रहे। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बनाए गए पंडालों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जहां अगले दस दिनों तक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होंगे।
आरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब-
गणेश स्थापना के बाद शाम को विभिन्न गणेश पंडालों में आरती हुई। आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दीपों की रोशनी, घंटियों की गूंज और गणपति बप्पा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। परिवारों के साथ बड़ी संख्या में युवा और बच्चे भी गणेशोत्सव में उत्साह से सहभागी बने। नागदा स्थित प्राचीन गणेश मंदिर में भी गणेश चतुर्थी पर सुबह से ही भक्तों का दर्शन के लिए तांता लगा रहा। मंदिर में विशेष पूजन-अर्चन किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीगणेश के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
सरकारी कार्यालयों में भी विराजे गणपति-
गणेशोत्सव की आस्था सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थाओं तक भी पहुंची। शहर के विभिन्न सरकारी कार्यालयों में भगवान श्रीगणेश की आकर्षक प्रतिमाओं की स्थापना कर पूजा-अर्चना की गई। कर्मचारी भी उत्साह के साथ गणेशोत्सव में शामिल हुए।
मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता-
इस बार श्रद्धालुओं ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमाओं की स्थापना को प्राथमिकता दी। हालांकि बाजार में पीओपी की मूर्तियां भी बिक्री के लिए दिखाई दीं। प्रशासन द्वारा पीओपी की मूर्तियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर इनकी उपलब्धता नजर आई। शिक्षक आदित्य दुबे ने अपनी संस्था में 1 हजार से अधिक मूर्तियां मिट्टी से बनाई और मूर्ति बनाना भी सिखाया।
दस दिन चलेगा भक्ति का उत्सव-
गणेश चतुर्थी के साथ ही शहर में दस दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ हो गया है। अब शहर के विभिन्न पंडालों और घरों में नियमित पूजन-अर्चन, आरती, भजन और धार्मिक कार्यक्रम होंगे। गणपति बप्पा की भक्ति में शहर अगले दस दिनों तक पूरी तरह रंगा नजर आएगा। चौपाटी के समीप लालगेट के राजा का भी सुंदर पांडाल सजाया गया है। यहां भी धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन होंगे।
