
अनूपपुर, एसईसीएल के रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में कार्य कर रही जय अम्बे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ खाड़ा ग्राम के ग्रामीणों ने सोमवार को जोरदार आंदोलन किया। स्थानीय रोजगार सहित विभिन्न मांगों को लेकर ग्रामीणों के आंदोलन के चलते जय अम्बे कंपनी का काम लगातार 8 घंटे से अधिक समय तक बंद रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के लामबंद होने से परियोजना क्षेत्र में स्थिति गंभीर बनी रही।
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा क्षेत्र के प्रभावित एवं स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि जिस क्षेत्र की जमीन और संसाधनों से परियोजना संचालित हो रही है, उसी क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जय अम्बे प्राइवेट लिमिटेड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
*पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ने किया समर्थन*
आंदोलन के दौरान पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष रमेश सिंह मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों की जमीन और उनके जीवन से जुड़ी परियोजना में स्थानीय युवाओं को रोजगार का पहला अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कंपनी प्रबंधन से ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
रमेश सिंह ने कहा कि ग्रामीणों की जायज मांगों की अनदेखी लंबे समय तक नहीं की जा सकती। यदि स्थानीय लोगों को रोजगार सहित अन्य अधिकारों से वंचित किया गया तो जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर ग्रामीणों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा।
*कांग्रेस जिला अध्यक्ष गुड्डू सिंह चौहान भी पहुंचे*
आंदोलन की जानकारी मिलने पर वर्तमान कांग्रेस जिला अध्यक्ष गुड्डू सिंह चौहान भी खाड़ा पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं। गुड्डू सिंह चौहान ने कहा कि स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में कंपनी को पारदर्शी नीति अपनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कंपनी क्षेत्र में काम कर रही है तो उसे स्थानीय जनता के हितों और उनकी भावनाओं का सम्मान भी करना होगा। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों और प्रबंधन के समक्ष उठाया जाएगा।
*राजबहोर चंद्रा ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल*
पूर्व जनपद सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजबहोर चंद्रा ने भी आंदोलन में पहुंचकर ग्रामीणों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से रोजगार और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है।राजबहोर चंद्रा ने कहा कि कंपनी को यह समझना होगा कि परियोजना क्षेत्र में काम करने का मतलब केवल उत्पादन करना नहीं है, बल्कि प्रभावित और स्थानीय परिवारों के हितों की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने मांग की कि स्थानीय बेरोजगारों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए तथा भर्ती प्रक्रिया को सार्वजनिक और पारदर्शी बनाया जाए।
*जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति सिंह ने भी जताया समर्थन*
आंदोलन के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति सिंह का भी समर्थन ग्रामीणों को मिला। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की मांगों को बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं का लाभ सबसे पहले उस क्षेत्र की जनता को मिलना चाहिए, जो परियोजना का प्रत्यक्ष प्रभाव झेल रही है।
*एसईसीएल क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी अमित सिंह पहुंचे मौके पर*
आंदोलन के दौरान स्थिति को देखते हुए एसईसीएल क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी अमित सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। वहीं अनूपपुर कोतवाली थाना प्रभारी एवं पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहे, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि स्थानीय अधिकारों और रोजगार की मांग को लेकर है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक कंपनी प्रबंधन स्थानीय लोगों की समस्याओं पर गंभीरता से निर्णय नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रखने पर विचार किया जाएगा।
*कंपनी के खिलाफ बढ़ता असंतोष*
रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में जय अम्बे प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ ग्रामीणों का यह आंदोलन क्षेत्र में बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा रहा है। आठ घंटे से अधिक समय तक कंपनी का काम बंद रहना बताता है कि रोजगार और स्थानीय हितों का मुद्दा अब ग्रामीणों के लिए बेहद गंभीर हो चुका है।
ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए, प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान किया जाए और जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के साथ नियमित संवाद स्थापित किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
