सतना: मैहर जिले के बड़ा अखाड़ा परिसर में स्थापित गणेश प्रतिमा के आकार में वृद्धि होने की बात हमेशा चर्चा में रहती है. वर्षों पुराने इस मंदिर में भगवान गणेश का स्वरूप भी अद्भुत है.बड़ा अखाड़ा मंदिर के महंत सीताबल्लभशरण ने बताया कि इस मामले की जांच पुरातत्व विभाग की टीम ने भी की. उनके मुताबिक स्थापित गणेश प्रतिमा 6वीं शताब्दी की परम्परा के अनुरूप है. प्रतिमा का स्वरूप व उसकी नक्कासी जैसी 6वीं शदी की प्रतिमाओं में देखने को मिलती है वैसी ही है. उन्होंने बताया कि जिस मंदिर में श्रीगणेश जी विराजमान हैं वह छोटा और पत्थर की शिलाओं से बना हुआ है.
जिसे देखने पर ऐसा महसूस होता था कि इसके आकार व स्वरूप में वृद्धि हो रही है. इस मामले में आचार्य श्री मद्राम सुखेन्द्र जू सन् 1935 में आए.उनसे इस विषय पर तत्कालीन महंत जी ने चर्चा की. जिस पर उन्होंने दांये चरण के अंगूठे को दबाकर स्वरूप में विस्तार नहीं करने की प्रार्थना की. इसके बाद से मूर्ति के विस्तार में विराम लग गया. उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिमा की नित्य पूजा अर्चना लम्बे समय से की जा रही है. पहले इसके अर्चक कौन थे इसका उल्लेख निध्याचार्य जी से मिलता है. स्थानीय जनों के बीच गणेश चतुर्थी के अवसर पर इस तरह की चर्चा आम है
