
जबलपुर। खमरिया थाना अंतर्गत ग्राम तिगरा में शनिवार सुबह खाकी का मानवीय और जांबाज चेहरा सामने आया। दरअसल फांसी के फंदे पर लटके एक युवक को परिजन मृत समझ चुके थे, पुलिस के दो प्रधान आरक्षकों ने अपनी सूझबूझ और तत्परता से उसे नया जीवन दे दिया। थमी हुई सांसों के बीच जवानों ने मौके पर ही कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन दिया, जिससे युवक की धडक़नें वापस लौट आईं।
खमरिया थाना प्रभारी राजकुमार खटीक ने बताया कि शनिवार सुबह ग्राम तिगरा निवासी राजेश कोरी ने खमरिया थाने में सूचना दी कि उनके भांजे सचिन कोरी पिता सुरेश कोरी, 32 वर्ष ने फांसी लगा ली है और उसकी मौत हो चुकी है। सूचना पर पुलिस ने तत्काल मर्ग कायम किया और जांच के लिए प्रधान आरक्षक अरविंद श्रीवास्तव एवं प्रधान आरक्षक कपिल देव सेन को तुरंत मौके पर भेजा। परिजनों के मुताबिक सचिन दम तोड़ चुका था, लेकिन जैसे ही दोनों प्रधान आरक्षकों ने शव को फंदे से उतारकर चेक किया, तो उन्हें शरीर में हल्की गर्माहट महसूस हुई। उन्होंने तुरंत युवक की नब्ज टटोली। नब्ज बेहद धीमी, नाममात्र के लिए चल रही थी।
जिंदगी की डोर भांप दिया सीपीआर, हुआ चमत्कार
जिंदगी की डोर को भांपते हुए दोनों जवानों ने एक सेकंड भी बर्बाद नहीं किया। उन्होंने तुरंत सचिन को जमीन पर लिटाया और सीपीआर देना शुरू किया। प्रधान आरक्षक अरविंद और कपिल देव लगातार युवक के सीने को पंप करते रहे और कृत्रिम सांसें देते रहे। कुछ ही मिनटों की इस कोशिश के बाद एक बड़ा चमत्कार हुआ सचिन की छाती ऊपर-नीचे होने लगी और उसकी सांसें दोबारा चल पड़ीं। युवक की सांसें लौटते ही पुलिस टीम ने बिना देरी किए उसे शासकीय वाहन से इलाज के लिए अस्पताल रवाना किया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर है। विदित हो कि पुलिस फोर्स को समय-समय पर आपातकालीन जीवन रक्षा और सीपीआर का विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाता है। अधिकारियों से मिली इसी ट्रेनिंग के सही इस्तेमाल ने आज एक घर का चिराग बुझने से बचा लिया।
