भुवनेश्वर 30 अगस्त, (वार्ता) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कल्याणकारी योजनाओं के लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति, विशेषकर अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लोगों तक पहुँचें।
श्री बिरला ने आज यहां संसद और राज्य विधानमंडलों की अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समितियों के सभापतियों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन पर कहा कि केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों से ही विकास और प्रगति का वास्तविक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने प्रत्येक राज्य विधानमण्डल में अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के कल्याण के प्रति समर्पित समितियों के गठन की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि इन समुदायों से संबंधित मुद्दों पर पूरा ध्यान दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि संसद में पहले से ही ऐसी समितियाँ कार्य कर रही हैं जो कल्याणकारी उपायों की सक्रिय निगरानी कर रही हैं, लेकिन कुछ राज्यों में ऐसे संस्थागत तंत्र मौजूद नहीं हैं, जिससे जमीनी स्तर पर निगरानी नहीं हो पाती । श्री बिरला ने कहा कि ऐसी समितियाँ न केवल नीतियों और योजनाओं के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी को सुगम बनाएँगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेंगी कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदायों की समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान किया जाए।
उन्होंने कहा कि भारत ने अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों को अधिकार दिलाने और यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार किए हैं कि वे वर्तमान समय की आकांक्षाओं के अनुरूप हों। समितियाँ बजटीय प्रावधानों की सूक्ष्मता से जाँच करके, कल्याणकारी योजनाओं के कार्य निष्पादन की समीक्षा करके और सुधारों के सुझाव देकर इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस प्रकार की विस्तृत जाँच से न केवल शासन में पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है।
लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि विकास में सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए ताकि भारत बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के एक समतामूलक, न्यायसंगत और समावेशी समाज के सपने को वर्ष 2047 तक साकार कर सके । उन्होंने कहा कि यह केवल एक आकांक्षा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय दायित्व भी है । उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य और केन्द्र, दोनों स्तरों पर समितियाँ इस मिशन को केंद्र में रखकर कार्य करेंगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इन समितियों की सिफारिशों को आलोचना के बजाय, सुधार के लिए रचनात्मक मार्गदर्शन के रूप में देखा जाना चाहिए ।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “भुवनेश्वर एजेंडा 2025” आने वाले वर्षों में संसद और राज्य विधानमंडलों के कार्यों का मार्गदर्शन करेगा और कार्ययोजना के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद और बाबासाहेब आंबेडकर के विजन के साथ, भारत 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण की ओर आत्मविश्वास से आगे बढ़ेगा, जहाँ अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के प्रत्येक सदस्य को सम्मान, समानता और न्याय मिलेगा ।
