अब शहर में बैठे बैठे होगा दूसरे शहर की संपत्ति पंजीयन 

इंदौर. मध्यप्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. शासन ने पंजीयन अधिकारियों की सर्कल और शहरी सीमा समाप्त कर दी है. अब प्रदेश के किसी भी जिले में स्थित अचल संपत्ति की रजिस्ट्री दूसरे जिले के उप पंजीयक कार्यालय से कराई जा सकेगी. नई व्यवस्था 17 सितंबर से प्रदेश के सभी 55 जिलों में लागू होने की संभावना है. खास बात यह है कि उक्त नई पंजीयन व्यवस्था का राजपत्र प्रकाशन भी ही गया है.

इंदौर में रहने वाले किसी व्यक्ति को यदि मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, नीमच या प्रदेश के किसी अन्य जिले में संपत्ति खरीदनी है, तो रजिस्ट्री कराने दूसरे शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. अब खरीददार व्यक्ति इंदौर उप पंजीयक कार्यालय संपत्ति पंजीयन करा सकेगा. ध्यान रहे कि नई पंजीयन व्यवस्था से भले ही खरीददार को आने जाने से राहत मिलेगी, लेकिन संपत्ति का सही मूल्यांकन होने पर संदेह रहेगा. व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत संपत्ति की जानकारी सही है या नहीं? इसकी जांच कैसे होगी? साथ ही सबसे बड़ा नुकसान होगा स्टाम्प शुल्क गणना में, जो सही की गई हैं या नहीं. सिर्फ गाइड लाइन दर को आधार मानकर गणना करने से राजस्व का नुकसान होने की संभावना बढ़ जाएगी.

संदेह पर अधिकारी करते हैं मौका मुआयना 

अभी पंजीयन व्यवस्था में किसी संपत्ति में कोई संदेह है, तो अधिकारी संपत्ति का मौका मुआयना करते है. उसके फोटो और मौके पर अंतर होने पर नए सिरे से गणना कर अंतर की स्टाम्प शुल्क राशि जमा कराई जाती है। इंदौर के उप पंजीयक को संदेह है तो वो दूसरे शहर में मौका मुआयना करने जाएगा या इंदौर के उप पंजीयक कार्यालय का काम देखेगा? यह राजस्व आय बढ़ाने और सिर्फ आने जाने की बचत को लेकर बहुत बड़ी विसंगति नजर आ रही है.

सम्पदा पोर्टल 2.0 से बदलेगी पूरी प्रक्रिया

नई व्यवस्था के तहत सम्पदा 2.0 पोर्टल पर स्लॉट बुक कर दूसरे जिले की संपत्ति की रजिस्ट्री कराई जा सकेगी. स्लॉट बुक होने के बाद संबंधित उप पंजीयक को दस्तावेजों की जांच और संपत्ति से जुड़ी जानकारी की पड़ताल के लिए छह दिन का समय मिलेगा. सब कुछ सही पाए जाने पर सातवें दिन रजिस्ट्री पूरी की जा सकेगी.

शासन ने जारी किया गजट नोटिफिकेशन- नायडू

वरिष्ठ पंजीयक अमरेश नायडू ने बताया कि पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के अधिकारियों की क्षेत्रीय अधिकारिता अब प्रदेश के सभी उप जिलों तक बढ़ा दी गई है. इसके लिए शासन की ओर से गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है. इस बदलाव के बाद संपत्ति जिस जिले में है, रजिस्ट्री भी वहीं कराना जरूरी नहीं रहेगा.

स्टांप शुल्क की चोरी बढ़ेगी – प्रमोद द्विवेदी

पंजीयन अधिवक्ता संघर्ष समिति के प्रमोद द्विवेदी ने कहा कि उक्त व्यवस्था लागू करने से स्टांप शुल्क चोरी बढ़ जाएगी. सबसे ज्यादा जरूरी है कि संपदा पोर्टल 2.0 अभी ठीक से काम ही नहीं कर रहा है. स्लॉट बुकिंग में अभी भी भारी दिक्कते है, जो सरकार द्वारा दुरस्त नहीं की गई है.

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