पीपीपी से निवेश, एआई से रूट प्लानिंग और तकनीक से सुरक्षित होगा सफर

इंदौर. मध्यप्रदेश में सार्वजनिक यात्री परिवहन को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’ में छह सत्रों में विशेषज्ञों ने मंथन किया. चर्चा बस संचालन में पीपीपी से शुरू होकर परिवहन इंफ्रास्ट्रख्र, वित्तीय आत्मनिर्भरता, रोजगार-उद्यमिता, यात्री सुरक्षा और डेटा-एआई आधारित रूट प्लानिंग तक पहुंची. समिट का प्रमुख फोकस 25 सितंबर से शुरू होने वाली मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और वर्ष 2030 के मोबिलिटी विजन पर रहा.

पहले सत्र में बस संचालन और आईटीएमएस में पीपीपी पर चर्चा हुई. सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह ने यात्री मांग के अनुसार लचीला मॉडल अपनाने की जरूरत बताई. उन्होंने कम मांग वाले क्षेत्रों में सबवेंशन के साथ एनसीसी और अधिक मांग वाले क्षेत्रों में एनसीसी मॉडल, जबकि जरूरत के अनुसार जीसीसी-एनसीसी के मिश्रित मॉडल का सुझाव दिया. पैनल में श्रेया गडेपल्ली ने शहरी मोबिलिटी प्लानिंग, टी. श्रीनिवास ने बस संचालन में तकनीकी समाधान और मोहित दुबे ने डिजिटल यात्री सेवाओं पर विचार रखे. दूसरे सत्र में भविष्य की परिवहन अवसंरचना और निजी निवेश पर चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव गृह संजय कुमार शुक्ला ने स्पष्ट कानूनी एवं वित्तीय ढांचे को पीपीपी की सफलता के लिए जरूरी बताया. भानु प्रताप सिंह भदौरिया ने ब्लेंडेड पीपीपी मॉडल, जबकि अमिताभ ठाकुर ने सरकारी इंफ्रास्ट्रख्र और निजी क्षेत्र की दक्षता के बेहतर समन्वय पर जोर दिया. अमित भट्ट ने ईवी चार्जिंग नेटवर्क और संजय सी. शाह ने बस स्टेशनों को आधुनिक बस पोर्ट के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया. छहों सत्रों का साझा निष्कर्ष रहा कि पीपीपी निवेश, आधुनिक इंफ्रास्ट्रख्र, वित्तीय स्थिरता, रोजगार, सुरक्षा और डेटा-एआई को एकीकृत कर ही मध्यप्रदेश में सुरक्षित, विश्वसनीय, किफायती और भविष्य के अनुरूप सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।

लचीले किराया निर्धारण की जरूरत

तीसरे सत्र में वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बस संचालन पर चर्चा हुई. राणा दत्ता ने ईंधन अर्थशास्त्र, प्रो. अशोक कुमार सरकार ने यात्री मांग के अनुरूप छोटी बसों और अमित हितकारी ने लचीले किराया निर्धारण की जरूरत बताई. विश्व बैंक के डॉ. लघु पराशर ने गैर-किराया आय बढ़ाने तथा भानु मेहरोत्रा ने डिपो में रिटेल और लॉजिस्टिक्स से अतिरिक्त राजस्व जुटाने पर जोर दिया.

रोजगार अवसरों की संभावनाएं

चौथे सत्र में रोजगार और उद्यमिता को परिवहन से जोड़ने पर चर्चा हुई. ओडिशा के जनसंपर्क विभाग के निदेशक संजय बिस्वाल ने केंद्र की योजनाओं के समन्वय से रोजगार अवसर बढ़ाने की संभावनाएं बताईं. विशेषज्ञों ने मुद्रा, पीएमईजीपी, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया और कौशल विकास योजनाओं से युवाओं, महिलाओं, ट्रांसपोर्टरों और एमएसएमई को जोड़ने पर जोर दिया.

एआई आधारित निगरानी मजबूत करें

पांचवें सत्र में यात्री सुरक्षा और सेवा विश्वसनीयता पर चर्चा हुई. ओडिशा के प्रमुख सचिव परिवहन एनबीएस राजपूत ने सीसीटीवी, पैनिक बटन और एआई आधारित निगरानी को मजबूत करने की बात कही. प्रो. एच.एम. शिवानंद स्वामी ने डेटा आधारित प्लानिंग, एसएन ढोले ने स्मार्ट टिकटिंग व दिव्यांग-अनुकूल सुविधाओं और प्रसन्ना पटवर्धन ने प्रिवेंटिव मेंटेनेंस पर जोर दिया.

रूट प्लानिंग पर मंथन

छठे सत्र में डेटा और एआई आधारित रूट प्लानिंग पर मंथन हुआ. एआईसीटीएसएल के अर्थ जैन ने मांग आधारित रूट रेशनलाइजेशन और री-शेड्यूलिंग की जानकारी दी. रवि गडेपल्ली ने एआई आधारित शेड्यूलिंग और ऑप्टिमाइजेशन, धीरेंद्र मेहरोत्रा ने यात्री मांग आधारित योजना और सुमित भरत ने डेटा संग्रह व एआई मॉडलिंग की जरूरत बताई.

Next Post

अब शहर में बैठे बैठे होगा दूसरे शहर की संपत्ति पंजीयन 

Sat Sep 12 , 2026
इंदौर. मध्यप्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. शासन ने पंजीयन अधिकारियों की सर्कल और शहरी सीमा समाप्त कर दी है. अब प्रदेश के किसी भी जिले में स्थित अचल संपत्ति की रजिस्ट्री दूसरे जिले के उप पंजीयक कार्यालय से कराई जा सकेगी. नई व्यवस्था […]

You May Like