पांढुरना में दिन भर होती रही पत्थरों की बरसात

पांढुरना,सदियों से चली आ रही परंपरा के तहत पांढुरना में शुक्रवार को विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला मनाया गया,पूरे दिन दोनों ही पक्ष के लोगों ने बड़े ही जोश और जुनून के साथ एक-दूसरे पर आमने-सामने से कि गई इस पत्थरबाजी में दोनों ही पक्षों के 900 से भी अधिक लोग घायल हुए है,जिसमें सात गंभीर रूप से घायल युवकों को प्राथमिक उपचार के बाद नागपुर रेफर किया गया,वहीं आठ लोगों को नगर जिला मुख्यालय के चिकित्सालय में ही भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।

सदियों पुरानी परंपरा के अनुरूप महाराष्ट्रीयन कृषकों के पोला त्यौहार के दूसरे दिन अर्थात आज 11 सितंबर शुक्रवार को यह गोटमार मेला अपनी धार्मिक आस्था,विश्वास एवं उत्साह के साथ पांढुरना नगर जिला मुख्यालय के मध्य से प्रवाहित होने वाले जाम नदी के राधा कृष्ण मंदिर वाले क्षेत्र में मनाया गया। गोटमार मेला,मेला न होकर एक तरह का युद्ध है,इसमें कोई दो या चार लोग,दो या चार घंटे नहीं बल्कि सैकड़ों लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की मौजूदगी में एक-दूसरे पर आमने-सामने से पत्थर मार विपक्षी योद्धाओं को खून से लहूलुहान करते है,इस मेले को पहली बार देखने वाले बहुत अधिक आश्चर्य चकित होते रहे।

प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी नगर प्रतिष्ठित नागरिकों की मौजदूगी में आज सूर्योदय के पूर्व ही गोटमार स्थल पर जाम नदी के बिचों -बिच कावले परिवार द्वारा अपनी परंपराओं का निर्वाह करते हुए पलाश वृक्ष रूपी झंड़े को पूरे रिती-रिवाजों के साथ गाड़ा गया,तत्ï पश्चात सर्व प्रथम सैकड़ों धर्मप्रेमियों ने अपने-अपने मन्नतों के अनुरूप गोटमार स्थल पर पहुंचकर झंड़े की पुजा-अर्चना कर निशान तथा चढ़ावा चढ़ाया,इस पूजा में नन्हें-मुन्हें बच्चें,महिलाएँ,पुरूष,वृध्द सभी का समावेश था। यह सिलसिला सुबह 10 बजे तक इसी प्रकार चलते रहा,इस दौरान कोई भी एक दुसरे पर पत्थर नहीं फेंकते। इसके बाद सुबह लगभग 10.25 मिनंट पर सर्वप्रथम युवाओं की उत्साही डोलियों ने बड़े ही जोश और जुनून के साथ एक-दुसरे पर पत्थरों से प्रहार शुरू करते हुए गोटमार मेले का शुभारंभ किया।

सुबह से शाम तक लोगों ने उठाया गोटमार मेले का लुफ्त 000

इस विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला को देखने के लिए पांढुरना जिले के सौसर,पांढुरना,नांदनवाडी तहसील क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों के साथ ही पडोसी जिले छिंदवाड़ा,बैतूल,सिवनी सहित सीमावर्ती महाराष्ट्र प्रदेश नागपुर,सावनेर,वरुड,मोर्शी,अमरावती आदि क्षेत्रों से बडी संख्या में लोग यहां पहुंचे थे,जिन्होंने नदि के दोनों और तटों के साथ ही यहां के उचे-उचे मकानों के छतों पर खडे होकर इस गोटमार मेले में दोनों पक्षों के सैकड़ों लोगों को एक दूसरे को आमने-सामने से पत्थरों से मारते देख गोटमार मेले का लुफ्त उठाया।

प्रशासन का दावा 300 से भी कम हुए घायल 000

वहीं प्रशासन द्वारा आज हुई इस गोटमार में दोनों ही पक्षों के कुल 300 लोग घायल होना बता रहे है, वहीं पत्थरों के इस प्रहार से नगर के सावरगांव वार्ड के संजय हरिशचंद्र धारपुरे 30,सचिन अशोक हाटेकर 38 राधा कृष्ण वार्ड,नितीन भादे सावरगांव 33,प्रहलाद साहू पांढुरना 48,सचिन नासरे 33 जलाराम वार्ड आदि को गंभीर रूप से घायल होने पर इन्हें प्राथामिक उपचार के बाद नागपुर रेफर किया गया है। जिसकी हालत गंभीर बताई जा रहीं है। वहीं अन्य 8 घायलों को नगर के शासकीय चिकित्सालय में भर्ती कर इनका उपचार किया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो इस पूरे दिन चले गोटमार मेले में 900 से भी अधिक लोग घायल हुए है ।

प्रशासन के सख्त हिदायत के बाद जमकर चली गोफन 000

वहीं सावरगांव तथा पांढुरना पक्ष वाले एक-दूसरों पर शाम 4 बजे के बाद से गोफन चलाने का आरोप लगाते सुनाई दे रहे थे। वहीं प्रत्यक्षदर्शियों ने भी दोनों ही और से कई योद्धाओं को गोफन का उपयोग करते हुये देखा,हालांकि प्रशासन द्वारा इस गोटमार मेले में गोफन पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया था. तथा गोफन चलाते पकड़े जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात प्रशासन के आला अधिकारियों द्वारा प्रत्येक बैठक में कहीं थी,अब सभी कि निगाहे प्रशासन के उन आला अधिकारियों पर टिकी है कि वे गोफन चलाने वाले कितने लोगों पर सख्त कार्रवाई कर पाती है,या फिर हमेशा की तरह ही यह बात भी एक वर्ष के लिए सिर्फ फाइलों में ही बंद होकर रह जायेंगी ।

गौरतलब हो कि दो रस्सियों को मिलाकर दोनों के बिचों-बिच पत्थर को रखने छोटी- छोटी रस्सियों से बनाया जाने वाले इस देहांती गोफन में पत्थर को रखकर उसे घुमा कर फेंकने पर पत्थर अधिक तेजी से दूर-दूर तक जाकर गिरता है तथा इसके बीच में आने वालों पर यह पत्थर बंदूक की गोली की तरह ही प्रहार करता है । प्रतिवर्ष की तरह ही इस वर्ष भी गोटमार में गोफन का उपयोग बहुत अधिक हुआ है । जिसकी वजह से ही इतने अधिक लोग घायल हुए है ।

पांढुरना पक्ष ने 6.03 मिनट पर तोड़ा झंडा 000

अपनी परंपरा अनुसार इस वर्ष भी सावरगांव पक्ष वालों द्वारा नदी में झंडे के स्वरूप में लगाए पलाश वृक्ष रूपी झंड़े को पांढुरना पक्ष वाले तोडऩे तो वहीं सावरगांव पक्ष वाले इस बचाने के लिए पूरे दिन प्रयास करते रहें,अंत:शाम 6:03 मिनट पर पांढुरना पक्ष वाले अपने सम्मान के इस प्रतिक झंड़े को तोडऩे में सफल हो गए,लेकिन इस नदि में से निकालकर ले जाने में पांढुरना पक्ष वालों को काफी मश्कत करनी पडी,जैसे ही पांढुरना पक्ष वाले इस झंड़े को ले जाने के लिए आगे बढ़ते उसी दौरान सावरगांव पक्ष के घात लगाकर बैठे युवाओं द्वारा इन पर पत्थरों से हमला कर देते थे,यह सिलसीला लगभग एक घंटे तक इसी तरह चलता रहा,लगभग एक घंटे तक चली इस कश्मकश के बाद अंत:दोनों ही पक्षों ने आपसी सहमती से झंडा नदी में से निकालकर किले पर स्थित माँ चंडिक़ा के दरबार में लेकर समर्मित करते हुए पुजा अर्चना कर गोटमार मेले का समापन किया गया ।

ग्राम पेढ़ोनी के साहसी युवक ने तोड़ा झंडा 000

इस वर्ष गोटमार मेले का यह जाम नदि के बीच लगाए गए झंडे को पांढुरना विकासखंड की आदिवासी बाहुल्य ग्राम पेढोनी में रहने वाले प्रज्वल तुमड़ाम ने शाम 6:03 बजे तोड़ दिया ।

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