
नयी दिल्ली, 10 सितंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े ऑनलाइन शोषण और दूसरे खतरों से बचाने के लिए फायरवॉल जैसे सुरक्षा उपाय करने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और न्यायाधीश वी. मोहना की बेंच ने गुरुवार को एक गैर सरकारी संगठन ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ की दायर याचिका पर यह नोटिस जारी किया। इस याचिका में इस बात को लेकर चिंता जताई गई है कि भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 11 के तहत नाबालिगों के अनुबंध करने में सक्षम न होने के बावजूद उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से अकाउंट बनाने और संचालित करने की अनुमति दी जा रही है।
याचिका में कहा गया है कि उपयोगकर्ताओं की उम्र और उनकी ओर से किसी कानूनी रूप से वैध अनुबंध में प्रवेश करने के अधिकार को सत्यापित करने वाली प्रभावी और एक समान व्यवस्था के अभाव में बच्चे ऑनलाइन ग्रूमिंग, यौन शोषण, डिजिटल ट्रैफिकिंग, सेक्सटॉर्शन, व्यवहार संबंधी प्रोफाइलिंग, निजी डेटा के दुरुपयोग, साइबर बुलिंग और उम्र के अनुरूप न होने वाली एडल्ट सामग्री के संपर्क जैसे गंभीर जोखिमों के सामने आ रहे हैं।
याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी नियम- 2021 में एक विशेष प्रावधान शामिल करने अथवा उपयुक्त दिशा-निर्देश तैयार करने की भी मांग की गई है, ताकि नाबालिग माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति के बिना ऐसा कोई अनुबंध न कर सकें। इसके साथ ही माता-पिता या अभिभावक की पहचान और उनके अधिकार की पुष्टि इलेक्ट्रानिक केवाईसी अथवा कानूनन मान्य किसी अन्य व्यवस्था के माध्यम से किए जाने की मांग की गई है।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि जहां नाबालिगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच की अनुमति है, वहां माता-पिता या अभिभावक की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए परामर्श जारी किए जाएं और संबंधित डिजिटल सेवा की प्रकृति तथा उससे जुड़े जोखिम के अनुरूप सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। इसमें सरकार की ओर से उपयुक्त व्यवस्था तैयार किए जाने तक अंतरिम दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है।
