लंघाडोल दुकान से तीन महीने का राशन गायब

सिंगरौली । गरीबों के पेट का निवाला सुनिश्चित करने वाली सार्वजनिक वितरण प्रणाली सिंगरौली में ही सवालों के घेरे में खड़ी दिखाई दे रही है। लंघाडोल की शा. उचित मूल्य दुकान को लेकर सामने आई शिकायत ने खाद्य विभाग की निगरानी व्यवस्था की पोल खोलने का दावा किया है।

सरई तहसील क्षेत्र के लंघाडोल उचित मूल्य दुकान के कई हितग्राही ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें करीब तीन महीने से राशन नहीं मिला, जबकि जुलाई में करीब 182 राशन कार्डधारकों के घर जाकर अंगूठा लगवाया गया। इसके बावजूद खाद्यान्न वितरण नहीं किया गया। शिकायतें होने के बाद भी हितग्राहियों को अब तक राहत नहीं मिलने से ग्रामीणों में आक्रोश है। मामला शासकीय उचित मूल्य दुकान लंघाडोल का है, जहां विके्रता गोकुल साकेत को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की गई है। शिकायत कर्ताओं के अनुसार जुलाई में हितग्राहियों से घर-घर जाकर अंगूठा लगवाया गया, लेकिन राशन उनके हाथ नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जुलाई से दुकान नियमित रूप से नहीं खुली। 7 सितंबर को दुकान कुछ समय के लिए खोली गई, लेकिन इसके बाद फिर बंद हो गई। सबसे गंभीर सवाल ऑनलाइन और भौतिक रिकॉर्ड को लेकर उठ रहा है। यदि 182 हितग्राहियों के अंगूठे लगवाए गए थे तो उनके नाम पर पोर्टल और रजिस्टर में राशन वितरण की क्या प्रविष्टि दर्ज हुई, यदि राशन वितरित नहीं हुआ तो अंगूठा किस प्रक्रिया के तहत लिया गया।

कई विके्रताओं पर खाद्य अमला मेहरवान

यह मामला अकेली दुकान तक सीमित है या जिले की अन्य उचित मूल्य दुकानों में भी इसी तरह की गड़बड़ियां चल रही हैं, यह जांच का विषय है। जिले में कई शासकीय उचित मूल्य दुकानों को लेकर अनियमितताओं की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं। आरोप तो यहां तक लगाए जाते हैं कि कुछ निरीक्षक स्तर के कर्मचारी दुकानदारों के साथ मिलीभगत कर शिकायतों को दबाने का प्रयास करते हैं और कुछ दुकानों से कथित तौर पर हर माह रकम तय होने की भी चर्चाएं हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। यदि विभाग के पास शिकायतें पहुंचने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती तो निगरानी तंत्र की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जिला खाद्य अधिकारी पीसी चंद्रवंशी का कहना है कि मामले की जांच देवसर एसडीएम द्वारा की जा रही है। जांच में अनियमितता या दोष सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विके्रता देता है एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी

ग्रामीणों का कहना है कि खाद्य विभाग की ओर से दो माह का राशन एक साथ उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन यह आश्वासन भी जमीन पर दिखाई नहीं दिया। राशन के इंतजार में हितग्राहियों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। विके्रता और उनके परिजनों पर अभद्र व्यवहार तथा विरोध करने पर एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी देने के आरोप भी शिकायत में लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने राशन दुकान का आवंटन बढ़ाने के नाम पर सरपंच से हस्ताक्षर कराने का आरोप भी लगाया है। उनका दावा है कि अतिरिक्त राशन आने पर उसे हितग्राहियों के बीच वितरित कराने की बात कही गई थी। यहां के आवंटन, स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, ई-पॉस मशीन के रिकॉर्ड और हितग्राहियों के अंगूठे की डिजिटल जानकारी की जांच कराई जाना जरूरी है।

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