
इंदौर. शहर में नगर निगम द्वारा किए जा रहे अमृत योजना के दावों के विपरीत कई क्षेत्रों में आज भी कई लोग पर्याप्त और शुद्ध पेयजल के लिए परेशान हैं. कई इलाकों में पानी की सप्लाई बिल्कुल नहीं हो रही है, तो कहीं लोग दूषित (गंदा) पानी पीने को मजबूर हैं.
ऐसा ही मामला वार्ड क्रमांक 48 अंतर्गत आने वाले बड़ी ग्वालटोली क्षेत्र में सामने आया है. यहां की तस्वीर निगम के इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है. क्षेत्र की पतली और छोटी गलियों में रहने वाले कई परिवार आज भी नियमित पेयजल के लिए परेशान हैं. राम मंदिर माया देवी हॉस्टल के पास वाली गलियों के रहवासियों ने नव भारत को बताया कि पीडब्ल्यूडी कार्यालय परिसर में बनी पानी की टंकी से क्षेत्र में जलापूर्ति की जाती है, लेकिन हॉस्टल से लगी कई गलियों के घरों तक पानी पहुंचता ही नहीं. जिन घरों में पानी आता है, वहां कई बार दूषित पानी की शिकायत रहती है. स्थिति यह है कि कुछ परिवार पीने के पानी के लिए पड़ोसियों के घरों पर निर्भर हैं. समस्या वर्षों पुरानी है. कई बार शिकायतें की गईं और पार्षद को भी समस्या बताई गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ. क्षेत्र में सरकारी बोरिंग की लाइन होने के बावजूद बोरिंग खराब होने पर लोगों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ता है. यहां वर्षों पुरानी पाइपलाइन मौजूद है, जबकि अमृत योजना के तहत अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आई.
यह बोले रहवासी…
हॉस्टल के पीछे की अधिकतर गलियों में पानी बहुत कम आता है. 15 मिनट पानी आता है और नल बंद हो जाते हैं. पार्षद सहित छोटे से बड़े जिम्मेदार तक शिकायतें की गईं, लेकिन समाधान नहीं हो पाया.
– नरेंद्र धीमान
पास लगे क्षेत्र में पानी आता है, लेकिन हमारे यहां तक नहीं पहुंचता. क्षेत्र में पुरानी लाइन डाली है, अमृत योजना का सुनने में आया था, लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं की गई.
– रणजीत वर्मा
शुरूआत में काफी देर तक दूषित पानी आता है. पास के क्षेत्रवासी पानी भर लेते हैं, उसके बाद अच्छा पानी आता है, तब तक नल बंद हो जाते हैं. पीने का पानी हम पड़ोसियों से लेते हैं.
– आशीष कुमार बोरासी
अक्सर शिकायत मिलती है, क्योंकि टंकी से प्रेशर कम आता है. इस कारण यहां समस्या बन जाती है. अमृत योजना के तहत सर्वे हो चुका है, जहां-जहां समस्याएं हैं, वहां पहले कार्य कर लोगों को लाभ दिलाएंगे.
– विजयालक्ष्मी गोहर, पार्षद
