हैदराबाद, ग्लोबल रिसर्च एजेंसी एडीपी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा जारी ‘पीपुल एट वर्क 2026’ रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसके मुताबिक भारत में करीब 24 प्रतिशत कर्मचारी हर हफ्ते 16 घंटे या उससे अधिक का ऐसा काम करते हैं जिसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं मिलता। यह आंकड़ा वैश्विक औसत (12%) से ठीक दोगुना है, और इस अघोषित ओवरटाइम की मार सबसे ज्यादा रिमोट वर्किंग करने वालों, सीनियर मैनेजर्स और सी-सुइट एग्जीक्यूटिव्स पर पड़ रही है।
कर्मचारियों के एंगेजमेंट में भारी गिरावट और एआई के इस्तेमाल में भारत दुनिया में सबसे आगे
अतिरिक्त काम और डिजिटल ओवरलोड के इस बढ़ते दबाव का सीधा असर कर्मचारियों की मानसिक सेहत और कार्यक्षमता पर देखा जा रहा है, जिसके चलते भारत में कर्मचारियों का अपने काम के प्रति जुड़ाव (एंगेजमेंट) 24% से घटकर केवल 19% रह गया है। हालांकि, तकनीकी मोर्चे पर भारतीय वर्कफोर्स ने बढ़त हासिल की है और देश के 41 प्रतिशत कर्मचारी अपने रोजमर्रा के कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर रहे हैं, जो पूरी दुनिया में सबसे ऊंचा आंकड़ा है।
मानसिक तनाव और वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ने के बीच ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ बिल पर चर्चा
लंबे समय तक काम करने और निजी जीवन में ऑफिस के निरंतर दखल के कारण कर्मचारियों में बढ़ता मानसिक तनाव और बर्नआउट अब एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। इस गंभीर समस्या से निपटने और कर्मचारियों को बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस दिलाने के लिए अब भारतीय संसद में ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ (काम के घंटों के बाद अनडिस्टर्ब रहने का अधिकार) बिल पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

